प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल का नाम शहीद रोशन सिंह करने की मांग तेज हुई
प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल का नाम शहीद रोशन सिंह करने की मांग तेज हुई
प्रयागराज, आठ अगस्त (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी का प्रयागराज में “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम संपन्न होने के बीच शनिवार को शहर में पोस्टर के जरिए राजनीतिक संदेश देने का सिलसिला तेज हो गया। एक ओर जहां राहुल गांधी के समर्थन और सरकार के खिलाफ पोस्टर लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल का नाम बदलकर काकोरी के शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने की मांग वाले पोस्टर भी कई स्थानों पर लगाए गए।
संयोगवश, जिस एसआरएन अस्पताल में शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर इस अस्पताल का नाम करने की मांग के साथ महुआ डाबर संग्रहालय के संस्थापक डॉ. शाह आलम और उनके साथी धरने पर बैठे हैं, कुछ ही दूरी पर केपी ग्राउंड में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया।
काकोरी ट्रेन कार्रवाई मामले में दोषी ठहराए गए ठाकुर रोशन सिंह को इसी मलाका जेल में फांसी दी गई थी। स्वतंत्रता के बाद मलाका जेल को अस्पताल में तब्दील कर दिया गया और इसका नाम बदलकर स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि नौ अगस्त, 1925 को हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों- राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्र नाथ लाहिरी ने लखनऊ जिले में काकोरी रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन रोककर गार्ड के केबिन से अंग्रेजों का खजाना लूटा था। इन सभी को अंग्रेज सरकार द्वारा 19 दिसंबर, 1927 को फांसी पर चढ़ाया गया था।
कई बार संपर्क किए जाने के बावजूद, उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक से इस पर टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका। पाठक राज्य के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं।
इस मामले में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “एसआरएन अस्पताल का नाम बदलकर ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने की मांग का मेरा और मेरी पार्टी का पूर्ण समर्थन है। हमें स्वरूपरानी का नाम बदलने पर कोई आपत्ति नहीं है। हमारा मानना है कि ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान का सम्मान होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व में गलतियां हुई हैं और उन्हें ठीक करने का यह सही समय है। नौ अगस्त को काकोरी ट्रेन कार्रवाई की 101वीं वर्षगांठ है। इस दिन, स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल का नाम बदलकर ठाकुर रोशन सिंह किया जाना चाहिए। प्रयागराज में पहले ही 40 से अधिक संस्थान नेहरू परिवार के नाम पर हैं, इसलिए इस कदम से किसी के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।’’
राजभर ने कहा, “मेरा मानना है कि अखिलेश यादव को भी इस प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए क्योंकि उन्हें पता है कि महाराजा सुहेलदेव राजभर जी को उचित सम्मान प्राप्त करने में करीब एक हजार वर्षों का समय लगा और सलार मसूद गाजी जैसे विदेशी आक्रांताओं की इस देश में लगातार पूजा की जाती रही।’’
राजभर ने यह भी कहा कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास ले जाएंगे।
उन्होंने कहा, “जहां तक स्वरूपरानी जी का संबंध है, हमारे दिलों में उनका सम्मान रहा है और रहेगा। भारत के लिए उनका उल्लेखनीय योगदान है। वह हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।’’
भाषा राजेंद्र
शफीक
शफीक

Facebook


