टीवीके को समर्थन देने के मुद्दे पर अन्नाद्रमुक में मतभेद

टीवीके को समर्थन देने के मुद्दे पर अन्नाद्रमुक में मतभेद

टीवीके को समर्थन देने के मुद्दे पर अन्नाद्रमुक में मतभेद
Modified Date: May 11, 2026 / 02:48 pm IST
Published Date: May 11, 2026 2:48 pm IST

चेन्नई, 11 मई (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के विधायकों के सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) को समर्थन देने के मुद्दे पर विभाजित होने से पार्टी में आतंरिक मतभेद पैदा हो गया है, जबकि पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के खिलाफ विद्रोह होने के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।

राज्य विधानसभा की कुल 234 में से 167 सीट पर चुनाव लड़ने वाली अन्नाद्रमुक केवल 47 सीट ही हासिल कर सकी।

चुनावी नतीजों के बाद पार्टी महासचिव पलानीस्वामी की अध्यक्षता में विधायकों की कई बैठकें आयोजित की गईं।

अन्नाद्रमुक सूत्रों के अनुसार, जहां पार्टी का एक गुट सरकार गठन में टीवीके को समर्थन देने का कड़ा विरोध कर रहा था, वहीं दूसरे गुट ने विजय के नेतृत्व वाली पार्टी को बाहर से समर्थन देने की वकालत की।

कुछ विधायकों ने पार्टी के खराब चुनावी प्रदर्शन के मद्देनजर पलानीस्वामी से पद छोड़ने की भी मांग की।

सी. वे षणमुगम और एस. पी. वेलुमणि सहित कई वरिष्ठ नेताओं तथा पूर्व मंत्रियों के साथ ही उनके समर्थक विधायकों ने पलानीस्वामी की अध्यक्षता में हुई बैठकों में भाग नहीं लिया।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि षणमुगम, वेलुमणि और उनके समर्थकों ने टीवीके का समर्थन करने में रुचि दिखाई है।

अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता के.सी. पलानीसामी ने कहा, ‘‘पार्टी के भीतर स्पष्ट विभाजन है। कई विधायक नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं। अगर पलानीस्वामी नेता बने रहते हैं, तो कुछ विधायकों द्वारा टीवीके को समर्थन देने के आसार हैं।’’

उन्होंने कहा कि पलानीस्वामी को पार्टी के शीर्ष पद से ‘‘स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए’’ ताकि पार्टी अगला चुनाव एकजुटता के साथ लड़े।

राजनीतिक विश्लेषक सत्यालय रामकृष्णन ने कहा कि अन्नाद्रमुक नेताओं के बीच गलतफहमियों को वार्ता करते हुए मिलजुलकर दूर किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि अब तक पार्टी एकजुट है क्योंकि अन्नाद्रमुक के सभी विधायक विधानसभा में एक साथ बैठे थे। वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में कोई फूट नहीं पड़ने देनी चाहिए।’’

भाषा यासिर वैभव

वैभव


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