दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से त्रि-भाषा नीति के क्रियान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया

दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से त्रि-भाषा नीति के क्रियान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया

दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से त्रि-भाषा नीति के क्रियान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया
Modified Date: June 7, 2026 / 03:28 pm IST
Published Date: June 7, 2026 3:28 pm IST

नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए चालू शैक्षणिक सत्र के बीच में त्रि-भाषा नीति को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने पर चिंता जतायी और इसे फिलहाल स्थगित करने का आग्रह किया है।

शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि पर्याप्त शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और नयी व्यवस्था लागू किए जाने से पहले बगैर तैयारी के सत्र के बीच में इस नीति को अचानक लागू करने से गंभीर अव्यवस्था पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि स्थिति कुछ वैसी ही हो सकती है जैसी सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को जल्दबाजी में लागू करने के दौरान उत्पन्न हुई।

मोदी को लिखे पत्र में सिंह ने कहा, ‘‘मैं सीबीएसई की नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए मौजूदा सत्र के बीच त्रि-भाषा नीति को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने का विरोध करने वाले चिंतित अभिभावकों के एक समूह का ज्ञापन आपको भेज रहा हूं।’’

सिंह ने कहा कि उनके संज्ञान में यह भी लाया गया है कि दिसंबर 2025 में हुई बैठक में सीबीएसई के शासी निकाय ने पाठ्यक्रम समिति की उस सिफारिश को मंजूरी दी थी, जिसके अनुसार ‘एनसीईआरटी द्वारा भाषाओं की स्तरीय (ग्रेडेड) पाठ्यपुस्तकें जारी होने तक स्कूल मौजूदा अध्ययन योजना, विशेषकर भाषा संबंधी व्यवस्था को जारी रखें।’’

राज्यसभा सदस्य ने कहा कि अपने ही शासी निकाय के निर्णय के बावजूद सीबीएसई ने 15 मई 2026 को एक परिपत्र जारी कर एक जुलाई 2026 से नौवीं कक्षा में तीसरी भाषा की पढ़ाई लागू करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने अभी तक भाषाओं की ग्रेडेड पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं की हैं और इसलिए सीबीएसई ने एनसीईआरटी की छठी कक्षा की पुस्तकों के उपयोग की सिफारिश की है।

सिंह ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं है कि सीबीएसई ने अपने शासी निकाय के निर्णय को इतने स्पष्ट रूप से कैसे और क्यों पलट दिया और वह भी ऐसे तरीके से जो देशभर के हजारों स्कूलों की शैक्षणिक योजना को प्रभावित कर सकता है।’’

दिग्विजय सिंह ने कुछ दिन पहले नीट-यूजी परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने सरकार से पिछले आठ वर्षों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हुए प्रश्न पत्र लीक या अन्य अनियमितताओं तथा उनपर की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा था कि ऐसे समय में जब लाखों छात्र भारी मानसिक दबाव में हैं, परीक्षा प्रणाली पर उनका भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

सिंह के पत्र को ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीएसई के नौवीं और दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा को मनमाने और गैर-योजनाबद्ध तरीके से शामिल करने पर रोक लगाने की मांग की है, जो सीबीएसई के शासी मंडल के फैसले के विरोधाभासी है।’’

भाषा वैभव सुरेश

सुरेश


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