दिव्यांग अधिकार संगठन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में दिव्यांगजनों के लिए कोटे की मांग की

दिव्यांग अधिकार संगठन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में दिव्यांगजनों के लिए कोटे की मांग की

दिव्यांग अधिकार संगठन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में दिव्यांगजनों के लिए कोटे की मांग की
Modified Date: April 14, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: April 14, 2026 10:27 pm IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एनसीपीईडीपी ने मंगलवार को दिव्यांगजनों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब देश लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

एनसीपीईडीपी के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने पीटीआई-भाषा से कहा कि दिव्यांगता को अब भी मुख्य रूप से कल्याण के नजरिए से देखा जाता है, न कि समान भागीदारी और अधिकारों के मुद्दे के रूप में।

उन्होंने कहा, “अगर आप दिव्यांगता को केवल लागत के रूप में देखते हैं जैसे पेंशन देना, मुफ्त सहायता और छात्रवृत्ति तो यह जरूरी है, लेकिन मेरा तर्क है कि दिव्यांग लोग हमेशा बाद में याद किए जाते हैं और यह स्थिति तब तक नहीं बदलेगी, जब तक हमें निर्णय लेने की प्रक्रिया में जगह नहीं मिलेगी।”

अली ने कहा कि दिव्यांगजन निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से अब भी बाहर हैं और उन्होंने समावेशन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि हमारे देश में क्या हो रहा है। राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन हमें भी इसका हिस्सा बनना है।”

महिलाओं के आरक्षण पर जारी बहस के साथ दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण की मांग पर अली ने दिव्यांगजनों के लिए अलग आरक्षण या उन्हें मौजूदा आरक्षण ढांचे—जैसे महिला आरक्षण या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कोटा में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही, उन्होंने विधायिकाओं में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और राज्यसभा में सीटों के जरिए भी दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण की मांग की।

उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों के विस्तार को देखते हुए वर्तमान समय को “ऐतिहासिक” बताया और कहा कि प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का यह उपयुक्त समय है।

उन्होंने कहा, “अगर अब नहीं, तो कब? परिसीमन के तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 तक हो सकती है। अगली बार ऐसा अवसर कब मिलेगा, यह पता नहीं।”

संस्था ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने विधायिकाओं में दिव्यांगजनों के लंबे समय से चले आ रहे कम प्रतिनिधित्व को दूर करने के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर समानांतर राष्ट्रीय चर्चा की मांग की है।

संस्था ने बताया कि उसने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर व्यापक चुनावी सुधार ढांचे में दिव्यांगजनों के लिए राजनीतिक आरक्षण शामिल करने का आग्रह किया है।

भाषा

राखी नरेश

नरेश


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