ओडिशा में आंगनवाड़ी केंद्र में दलित महिला की नियुक्ति को लेकर विवाद सुलझ गया है : अधिकारी
ओडिशा में आंगनवाड़ी केंद्र में दलित महिला की नियुक्ति को लेकर विवाद सुलझ गया है : अधिकारी
केंद्रपाड़ा (ओडिशा), 14 फरवरी (भाषा) केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन ने दलित महिला की आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में नियुक्ति को लेकर विवाद का मुद्दा संसद में उठाये जाने के दो दिन बाद शनिवार को कहा कि मामले को बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है।
केंद्रपाड़ा जिले के उप-जिलाधिकारी अरुण नायक ने कहा कि यह मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है, क्योंकि ग्रामीणों ने अपने बच्चों को सोमवार से आंगनवाड़ी केंद्र भेजने पर सहमति जतायी है।
उन्होंने कहा, “21 नवंबर से अपने बच्चों को केंद्र भेजना बंद कर चुके सवर्ण समुदाय के लोगों के साथ अंतिम दौर की बातचीत संबंधित पक्षों की मौजूदगी में की गई। इनमें राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और ओडिशा राज्य महिला आयोग के सदस्य भी शामिल थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को पुरानी जातिगत प्रथाओं के उन्मूलन के बारे में जागरूक किया।”
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सदस्य सुजाता नायक ने बताया कि अभिभावकों की सहमति मिलने के बाद आंगनवाड़ी केंद्र सोमवार से सामान्य रूप से कार्य करेगा।
यह विवाद घलीमाला ग्राम पंचायत अंतर्गत नुआगांव ग्राम में उत्पन्न हुआ, जहां निवासियों ने लगभग तीन महीने तक केंद्र का बहिष्कार किया और गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक खाद्य सामग्री लेने से भी इनकार कर दिया। वे दलित महिला शर्मिष्ठा सेठी को सहायिका के रूप में नियुक्त किए जाने के विरोध में थे।
सेठी को नवंबर 2025 में नियुक्त किया गया था, क्योंकि इस पद के लिए कोई अन्य आवेदक नहीं था। सेठी ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि मामला सुलझ गया है। मैं बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र में वापस देखने और महिलाओं को सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्राप्त करते देखने के लिए बेहद उत्सुक हूं।’
उन्होंने कहा, ‘मैं बच्चों और महिलाओं की सेवा करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगी।’
कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यस्थलों पर जातिगत भेदभाव पर 12 फरवरी को चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने ओडिशा की एक हालिया घटना का हवाला दिया था, जहां एक विशेष समुदाय के लोगों ने दलित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा पकाए गए भोजन को अपने बच्चों को खिलाने से इनकार कर दिया था।
खरगे ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘‘21वीं सदी में, जब हम सामाजिक विकास, सामाजिक सुधार और हिंदुओं की एकता की बात करते हैं, तब एक विशेष समुदाय के लोग ओडिशा के एक आंगनवाड़ी केंद्र में सहायिका-सह-रसोइया के रूप में कार्यरत दलित महिला द्वारा पकाए गए भोजन को अपने बच्चों को खिलाने से इनकार कर रहे हैं। उस आंगनवाड़ी केंद्र का पिछले तीन महीनों से बहिष्कार किया जा रहा है।’
एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि केंद्र व्यावहारिक रूप से बंद रहा, इसलिए जिला प्रशासन ने विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए गांव में एक उच्च स्तरीय टीम भेजी, लेकिन शुरुआत में वह असफल रही।
विरोध कर रहे निवासियों ने अंततः यह महसूस करने के बाद सहमति जतायी कि बच्चों को पूर्व-विद्यालय शिक्षा से वंचित करना उनके भविष्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
ओडिशा राज्य महिला आयोग की सदस्य कल्पना मलिक ने कहा कि उन्होंने ग्रामीणों के साथ विस्तृत चर्चा की, जिसके बाद वे अंततः एक शिक्षित महिला का उसकी जाति के आधार पर विरोध करना बंद करने के लिए सहमत हुए।
सरपंच शैलेंद्र मिश्रा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि भविष्य में गांव में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी। नुआगांव ग्राम की आबादी 450 है। लोगों के बीच भाईचारा, एकजुटता और सौहार्द बरकरार है। हाल की घटना एक छिटपुट घटना थी।”
ग्रामीण गोबर्धन प्रधान ने कहा, “हमने अतीत के विवाद को भुला दिया है। अब हम केंद्र में दलित आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति का विरोध नहीं करेंगे।”
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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