द्रमुक ने नीट खत्म करने की मांग पर जोर दिया, संसद के बाहर प्रदर्शनों को उचित ठहराया

द्रमुक ने नीट खत्म करने की मांग पर जोर दिया, संसद के बाहर प्रदर्शनों को उचित ठहराया

द्रमुक ने नीट खत्म करने की मांग पर जोर दिया, संसद के बाहर प्रदर्शनों को उचित ठहराया
Modified Date: July 22, 2026 / 12:40 pm IST
Published Date: July 22, 2026 12:40 pm IST

चेन्नई, 22 जुलाई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता टी. के. एस. एलंगोवन ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रति अपनी पार्टी के लंबे समय से जारी विरोध को दोहराते हुए इस केंद्रीकृत मेडिकल प्रवेश परीक्षा को तत्काल समाप्त करने की बुधवार को मांग की।

एलंगोवन ने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐसी व्यवस्था को बनाए हुए है जो मेधावी विद्यार्थियों के बजाय व्यावसायिक कोचिंग संस्थानों और प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोहों को लाभ पहुंचाती है।

एलंगोवन ने पार्टी के प्रमुख राजनीतिक वादे का उल्लेख करते हुए कहा कि नीट को समाप्त करना द्रमुक के चुनाव घोषणापत्रों का एक अहम वादा रहा है और तमिलनाडु के मतदाताओं ने लगातार इसका समर्थन किया है।

द्रमुक नेता ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा कि मौजूदा प्रवेश व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के साथ अन्याय करती है, क्योंकि उनके पास निजी कोचिंग पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं होते। उन्होंने अरियालुर की छात्रा अनीता की ‘‘दुखद मौत को नीट के खिलाफ राज्य के संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़’’ बताया।

एलंगोवन ने कहा, ‘‘जब विद्यार्थी स्कूल की अंतिम परीक्षा में अच्छे अंक हासिल कर सकते हैं तो नीट की क्या जरूरत है? बहुत अच्छे अंक पाने वाले विद्यार्थियों को मेडिकल महाविद्यालयों में प्रवेश नहीं मिला क्योंकि वे कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे।’’

उन्होंने कहा कि उत्तरी राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एलंगोवन ने कहा, ‘‘नीट का होना भाजपा के अनुकूल है… प्रश्नपत्र लीक होते हैं। कोचिंग संस्थान स्वयं विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध करा देते हैं। भारत में बेहद गंभीर स्थिति बनी हुई है।’’

द्रमुक प्रवक्ता ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हाल में नयी दिल्ली में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए आंदोलन को सड़कों पर ले जाने के फैसले को उचित ठहराया। उन्होंने दावा किया कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा को सुनियोजित तरीके से रोका जा रहा है।

एलंगोवन ने कहा, ‘‘अगर वह संसद में बोलना शुरू करते हैं तो लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति सदन की कार्यवाही स्थगित कर चले जाते हैं इसलिए उन्हें सड़क पर उतरकर संघर्ष करना पड़ा।’’

द्रमुक नेता ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर राज्य स्तर पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की व्यवस्था फिर लागू करने की मांग की। उन्होंने दोहराया कि चिकित्सा शिक्षा में राज्यों का अधिकार बहाल करने के पक्ष में व्यापक जनसमर्थन है।

भाषा सिम्मी शफीक

शफीक


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