जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच तैनात हैं स्वयंसेवी चिकित्सक, प्राथमिक उपचार देकर कर रहे हैं मदद
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच तैनात हैं स्वयंसेवी चिकित्सक, प्राथमिक उपचार देकर कर रहे हैं मदद
( तस्वीरों सहित )
नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) जंतर-मंतर पर स्वयंसेवी चिकित्सक एंबुलेंस के पास मौजूद हैं और वे ऐसे लोगों का उपचार कर रहे हैं जिनके हाथ-पैर सूज गये हैं या कट-छिल गये हैं अथवा वे बुखार या निर्जलीकरण से पीड़ित हैं।
प्रदर्शन स्थल पर भाषणों और नारों के बीच दिल्ली और आसपास के राज्यों से आए चिकित्सक अस्थायी चिकित्सा सहायता केंद्र चला रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने कर्तव्य की भावना से यह सेवा दे रहे हैं।
कुछ चिकित्सक दवाइयों, पट्टियों और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ओआरएस) बैग में लेकर भीड़ के बीच जा रहे हैं, जबकि अन्य प्रदर्शन स्थल के पास खड़ी एंबुलेंस में मौजूद रहकर बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ या अन्य आपात स्थिति में आये लोगों का तुरंत सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
इन स्वयंसेवकों में अमेरिका में कार्यरत चिकित्सक स्वैमन सिंह से संबद्ध गैर-सरकारी संगठन ‘फाइव रिवर्स हार्ट एसोसिएशन’ के सदस्य भी शामिल हैं। इस संगठन ने वर्ष 2021 के किसान आंदोलन के दौरान भी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई थी।
संगठन के स्वयंसेवक अमृतपाल सिंह ने बताया कि सोमवार को हुई झड़पों के वीडियो और घायलों की खबरें देखने के बाद उनकी टीम एंबुलेंस के साथ जंतर-मंतर पहुंची।
उन्होंने कहा, ‘‘नीट परीक्षा देश में डॉक्टर बनने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता हर नागरिक को प्रभावित करती है, क्योंकि अंततः हर मरीज अपनी जान डॉक्टर के भरोसे छोड़ता है। हम स्वयं डॉक्टर हैं, इसलिए समझते हैं कि छात्र किस बात के लिए संघर्ष कर रहे हैं और यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है।’’
‘फाइव रिवर्स हार्ट एसोसिएशन’ के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. स्वैमन सिंह ने ‘भाषा’ से कहा कि दिल्ली में लगभग 50 चिकित्सकों की टीम सेवा दे रही है, जिसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, सामान्य शल्य चिकित्सक, नर्सिंग कर्मी, फार्मासिस्ट और अन्य स्वयंसेवक शामिल हैं।
अमृतपाल सिंह ने बताया कि उनकी टीम मार्च वाले दिन से ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद है और कटने-छिलने, चोट, हाथ-पैर में सूजन, निर्जलीकरण, बुखार और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों का उपचार कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई लोग अब भी मार्च के दौरान लगी चोटों के साथ आ रहे हैं। बारिश में लंबे समय तक रहने के कारण कई लोगों को बुखार हो गया है। कुछ लोग थकावट के कारण सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं। जो भी हमारे पास आता है, हम उसका उपचार करने का प्रयास करते हैं।’’
उन्होंने बताया कि कई प्रदर्शनकारी अस्पताल जाने से बचते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग दिल्ली से बाहर के हैं और उन्हें अस्पतालों की जानकारी नहीं है। कुछ प्रदर्शन छोड़कर जाना ही नहीं चाहते। ऐसे में हम यहीं प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराते हैं और जरूरत पड़ने पर अस्पताल जाने की सलाह देते हैं।’’
नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर, सेवा दे रहीं एक महिला चिकित्सक ने बताया कि सोमवार के प्रदर्शन के वीडियो देखने के बाद वह एंबुलेंस और आवश्यक दवाइयों के साथ जंतर-मंतर पहुंचीं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम दवाइयां, ओआरएस और आपात चिकित्सा सामग्री लेकर आए हैं। आज भी कई लोग सूजे हुए पैरों, कटने-छिलने और अन्य चोटों के साथ आ रहे हैं। मौसम और बारिश में लंबे समय तक रहने के कारण कुछ लोगों को बुखार भी है।’’
उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक पूरे दिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम लगातार ऐसे लोगों पर नजर रखते हैं जिनकी तबीयत ठीक नहीं लगती। यदि किसी को चक्कर आते हैं या सांस लेने में परेशानी होती है तो हम तुरंत उसकी मदद करते हैं या उसे एंबुलेंस तक पहुंचाते हैं। हमारी कोशिश है कि किसी भी जरूरतमंद को यह महसूस न हो कि चिकित्सा सहायता के लिए वह अकेला है।’’
प्रदर्शन स्थल पर अब स्वयंसेवी चिकित्सक के रक्तचाप की जांच करते, घाव साफ करते, दवाइयां बांटते और तिरपाल या छाते के नीचे बैठे लोगों को ओआरएस के पैकेट वितरित करते हुए दृश्य आम हैं।
उत्तर प्रदेश से आए प्रदर्शनकारी हर्षित ने कहा कि चिकित्सकों की मौजूदगी से प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम यहां आए तो जानते थे कि मार्च के बाद कठिनाइयां हो सकती हैं। कई डॉक्टर जेब में प्राथमिक उपचार की सामग्री और दवाइयां लेकर घूम रहे हैं। इससे हमें भरोसा मिलता है कि हमारी देखभाल करने वाला कोई है, जबकि हम अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।’’
हर्षित ने दावा किया कि मार्च वाले दिन प्रदर्शन स्थल पर और अधिक डॉक्टर मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘मार्च के दौरान डॉक्टरों के साथ भी पुलिस ने मारपीट की थी। उसके बाद से उनकी संख्या कम हो गई।’’
राजौरी गार्डन निवासी 21 वर्षीय शिव ने कहा कि यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं आठ वर्ष का था, तब चिकित्सकीय लापरवाही के कारण मैंने अपने पिता को खो दिया। मैं जानता हूं कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता का क्या असर होता है। अच्छी शिक्षा व्यवस्था जरूरी है, क्योंकि वही ऐसे डॉक्टर तैयार करती है जिन पर हम अपनी जिंदगी का भरोसा करते हैं।’’
एक अन्य स्वयंसेवी चिकित्सक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों का समर्थन करना चिकित्सा शिक्षा में लोगों के भरोसे को बनाए रखने से भी जुड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक डॉक्टर के रूप में हम समझते हैं कि चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का असर दूर तक जाता है। हर मरीज डॉक्टर पर भरोसा करता है। यदि छात्र भविष्य के डॉक्टरों के चयन और प्रशिक्षण की व्यवस्था में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं तो यह ऐसा मुद्दा है जिस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।’’
देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र, अभिभावक और समर्थक लगातार जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्वयंसेवी चिकित्सक भी एंबुलेंस और चिकित्सा किट के साथ लगातार तैनात हैं और प्रदर्शन स्थल पर नारों, बैनरों और तंबुओं की तरह ही उनकी मौजूदगी भी अब एक सामान्य दृश्य बन गई है।
भाषा मनीषा माधव
माधव

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