चिकित्सकों ने समय से पहले जन्मे नवजात की दुर्लभ सर्जरी कर बचाई जान

चिकित्सकों ने समय से पहले जन्मे नवजात की दुर्लभ सर्जरी कर बचाई जान

चिकित्सकों ने समय से पहले जन्मे नवजात की दुर्लभ सर्जरी कर बचाई जान
Modified Date: July 19, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: July 19, 2026 5:34 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के एक अस्पताल के चिकित्सकों ने आहार नली की गंभीर जन्मजात विकृति से पीड़ित नवजात शिशु की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया। जुड़वां बच्चों में से इस एक शिशु का ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उसका जन्म समय से पहले हुआ था और उसका वजन मात्र 1.4 किलोग्राम था।

कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि गर्भावस्था के 34वें सप्ताह में जन्मे इस नवजात में ‘टाइप-सी ट्रेकियो-ईसॉफेजीअल फिस्टुला’ (टीईएफ) के अलावा ‘ईसॉफेजीअल एट्रेशिया’ नामक दुर्लभ जन्मजात विकार का पता चला। इस स्थिति में भोजन नली सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाती, उसका ऊपरी सिरा बंद रह जाता है, जबकि निचला सिरा श्वासनली से जुड़ जाता है जिससे शिशु के लिए भोजन निगलना और सामान्य रूप से सांस लेना कठिन हो जाता है।

जन्म के तुरंत बाद शिशु के मुंह से झाग निकलने लगे, अत्यधिक लार बनने लगी और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। एक्स-रे में इस बीमारी की पुष्टि हुई, जिसमें फीडिंग ट्यूब भोजन नली के ऊपरी हिस्से में ही उलझी या मुड़ी हुई दिखाई दे रही थी।

करीब दो घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व अस्पताल की बाल शल्य चिकित्सक एवं नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बाल शल्य चिकित्सा विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मीनू बाजपेयी ने किया।

ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने भोजन नली के दोनों सिरों के बीच तीन कशेरुकाओं के बराबर अंतर होने के बावजूद उन्हें सफलतापूर्वक जोड़ दिया।

डॉ. बाजपेयी ने कहा, ‘‘बहुत कम जन्म वजन वाले शिशुओं में भोजन नली के दोनों सिरों को सीधे जोड़कर सर्जरी करना बेहद कठिन होता है। ऐसे लगभग 54 प्रतिशत मामलों में वैकल्पिक उपचार पद्धति अपनानी पड़ती है। समय से पहले जन्मे शिशुओं में जीवित रहने की संभावना भी अपेक्षाकृत कम होती है।’’

भाषा

खारी दिलीप

दिलीप


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