ड्रोन आयात रिश्वत मामला : प्रमुख कॉरपोरेट समूह के वरिष्ठ अधिकारी और डीजीसीए के उप महानिदेशक गिरफ्तार

ड्रोन आयात रिश्वत मामला : प्रमुख कॉरपोरेट समूह के वरिष्ठ अधिकारी और डीजीसीए के उप महानिदेशक गिरफ्तार

ड्रोन आयात रिश्वत मामला : प्रमुख कॉरपोरेट समूह के वरिष्ठ अधिकारी और डीजीसीए के उप महानिदेशक गिरफ्तार
Modified Date: April 19, 2026 / 10:18 pm IST
Published Date: April 19, 2026 10:18 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक अन्य निजी कंपनी के लिए ड्रोन आयात की सुविधा प्रदान करने के बदले कथित तौर पर 2.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में एक प्रमुख कॉरपोरेट समूह के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भरत माथुर और नागर विमानन महानिदेशालय में ‘एयरवर्दीनेस डायरेक्टरेट’ के उप महानिदेशक को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को की गई कार्रवाई में सीबीआई ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) में ‘एयरवर्दीनेस डायरेक्टरेट’ के उप महानिदेशक मुदावथ देवुला और ड्रोन प्रौद्योगिक से जुड़ी कंपनी एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड के भरत माथुर को गिरफ्तार किया।

उन्होंने बताया कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत माथुर, देवुला और एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों ने बताया कि जिस प्रमुख कॉर्पोरेट समूह में माथुर काम कर रहे थे, उसे प्राथमिकी में नामजद नहीं किया गया है और एस्टेरिया एयरोस्पेस के 2024-25 के वित्तीय विवरणों के अनुसार, वह एस्टेरिया एयरोस्पेस की ‘मूल कंपनी’ है।

एस्टेरिया एयरोस्पेस या कॉर्पोरेट समूह की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान में बताया कि आरोपी डीजीसीए के अधिकारी ने कथित तौर पर एक निजी एयरोस्पेस कंपनी के लिए डीजीसीए के पास लंबित आवेदनों की मंजूरी और संबंधित आदेश जारी करने के बदले में निजी व्यक्तियों से अनुचित लाभ की मांग की थी।

उन्होंने बताया, ‘‘ केंद्रीय एजेंसी ने नयी दिल्ली स्थित डीजीसीए मुख्यालय में एयरवर्दीनेस डायरेक्टरेट के उप महानिदेशक को एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि के साथ 2.5 लाख रुपये के रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया। रिश्वत की पूरी राशि भी जब्त कर ली गई है।’’

बयान में कहा गया है कि सीबीआई ने दिल्ली में चार स्थानों पर आरोपी अधिकारी और अन्य निजी व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली और इस दौरान 37 लाख रुपये की नकदी के साथ-साथ सोने और चांदी के सिक्के और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

सीबीआई की ओर से दाखिल प्रतिक्रिया के मुताबिक, यह मामला एक विश्वसनीय सूत्र से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि देवुला ने कथित तौर पर विभिन्न निजी संस्थाओं के साथ मिलीभगत करके अनुमोदन और अनुमतियों के अनुदान से संबंधित मामलों में अनुचित लाभ के बदले में भ्रष्ट और अवैध गतिविधियों में संलिप्त हैं।

प्राथमिकी के मुताबिक सीबीआई को जानकारी मिली कि माथुर ने 18 मार्च को देवुला से संपर्क कर एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड के ड्रोन आयात से संबंधित कुछ आवेदनों की स्थिति के बारे में पूछताछ की थी।

इसके मुताबिक दो दिन बाद, देवुला ने कथित तौर पर माथुर से शामिल आवेदनों की संख्या के बारे में पूछा, जिस पर माथुर ने पुष्टि की कि एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड से संबंधित तीन आवेदन थे।

सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक, ‘‘ दोनों के बीच यह तय हुआ था कि फाइल को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत के तौर पर प्रति फाइल पांच लाख रुपये देने होंगे।’’

सीबीआई के मुताबिक इसमें आगे कहा गया है कि माथुर और देवुला के बीच 17 अप्रैल को यहां एक बैठक हुई थी, जहां देवुला ने उसी दिन काम पूरा होने का आश्वासन दिया था और यह भी कहा था कि शाम तक इसकी पुष्टि कर दी जाएगी।

प्राथमिकी के मुताबिक, ‘‘एक सूत्र ने यह भी बताया कि एम देवुला ने भरत माथुर को 18.04.2026 की शाम तक आईआईटी दिल्ली फ्लाईओवर के पास एसेक्स फार्म्स में रिश्वत की राशि पहुंचाने के लिए कहा था।’’

भाषा

धीरज नरेश

नरेश


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