आंकड़ों को छिपाकर मादक पदार्थ के संकट का समाधान नहीं किया जा सकता: पंजाब भाजपा नेता परमजीत कैंथ

आंकड़ों को छिपाकर मादक पदार्थ के संकट का समाधान नहीं किया जा सकता: पंजाब भाजपा नेता परमजीत कैंथ

आंकड़ों को छिपाकर मादक पदार्थ के संकट का समाधान नहीं किया जा सकता: पंजाब भाजपा नेता परमजीत कैंथ
Modified Date: January 11, 2026 / 04:44 pm IST
Published Date: January 11, 2026 4:44 pm IST

चंडीगढ़, 11 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पंजाब इकाई के अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने रविवार को दावा किया कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार राज्य में मादक पदार्थ के खतरे के खिलाफ अपने अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही और यह अभियान केवल नारों और प्रचार तक ही सीमित रह गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में मादक पदार्थ के कारण लगभग 280 लोगों की जान जा चुकी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने आरोप लगाया कि मादक पदार्थ के अत्यधिक दुरुपयोग (ओवरडोज) और नकली मादक पदार्थों से बढ़ती मौतें दर्शाती हैं कि सरकार मादक पदार्थों की आपूर्ति को नियंत्रित करने या एक प्रभावी जीवन रक्षक प्रणाली स्थापित करने में विफल रही है।

उन्होंने दावा किया कि इस विफलता का सबसे बुरा असर अनुसूचित जाति समुदाय और पंजाब के युवाओं पर पड़ रहा है।

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पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कैंथ ने कहा कि मादक पदार्थ के खिलाफ लड़ाई में आंकड़े महत्वपूर्ण हैं और उन्होंने भगवंत मान सरकार से मांग की कि वह मादक पदार्थों के सेवन, आपूर्ति शृंखला और उपचार के परिणामों पर विस्तृत और अद्यतन जानकारी सार्वजनिक करे।

कैंथ ने कहा कि बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, शिक्षा व रोजगार के अवसरों की कमी ने कई युवाओं को नशे की ओर धकेल दिया है, जबकि अपर्याप्त और घटिया गुणवत्ता वाले उपचार और पुनर्वास सुविधाओं ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।

उन्होंने कहा कि इससे गरीबी और सामाजिक असमानता और बढ़ रही है। भाजपा नेता ने नीति निर्माण और कार्यान्वयन के बीच व्यापक अंतर का आरोप लगाते हुए दावा किया कि सरकार की कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे-मोटे तस्करों तक ही सीमित रही है, जबकि बड़े तस्कर और संगठित गिरोह बच निकले हैं।

उन्होंने व्यवस्था में जवाबदेही की कमी, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया जिससे मादक पदार्थ माफिया को फायदा हुआ है।

कैंथ ने कहा कि नशा करने वालों के साथ मरीज के बजाय अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है, सरकारी नशामुक्ति केंद्रों की संख्या सीमित है और अनुवर्ती तंत्र कमजोर है, जिससे नशे की लत दोबारा लगने की दर बहुत अधिक है।

भाषा संतोष वैभव

वैभव


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