डूसू चुनाव: छात्र संगठनों ने अभियान के मुद्दों पर चर्चा शुरू की

डूसू चुनाव: छात्र संगठनों ने अभियान के मुद्दों पर चर्चा शुरू की

डूसू चुनाव: छात्र संगठनों ने अभियान के मुद्दों पर चर्चा शुरू की
Modified Date: August 8, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: August 8, 2026 8:03 pm IST

नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव सितंबर में होने की संभावना के बीच छात्र संगठन जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों की भावना को आगे बढ़ा रहे हैं और अभियान के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें प्रवेश से जुड़ी चिंताएं और मेट्रो में रियायत जैसी पुरानी मांगें शामिल हैं।

विभिन्न छात्र संगठनों के नेताओं ने कहा कि संभावित उम्मीदवार कॉलेजों में छात्रों से संपर्क करने लगे हैं और उन मुद्दों का आकलन कर रहे हैं, जो उनके चुनाव प्रचार का मुख्य आधार बन सकते हैं।

‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) की दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई की सचिव अंजलि ने कहा कि जंतर-मंतर पर हालिया छात्र आंदोलन वामपंथी छात्र संगठनों के बीच व्यापक गठबंधन का आधार बन सकता है।

उन्होंने कहा, ‘जैसा कि हमने हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में देखा है, हमारा एक साझा दुश्मन है। हमें उम्मीद है कि पिछले साल की तरह इस बार भी आइसा और एसएफआई के बीच वामपंथी गठबंधन होगा, ताकि हम छात्रों के हालिया विरोध प्रदर्शनों के मूल्यों को आगे बढ़ा सकें।’

अंजलि ने कहा कि आइसा की व्यापक मांगों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को वापस लेना और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करना शामिल है।

अंजलि ने कहा, ‘डूसू चुनावों के लिए, जाहिर है, मुद्दे मुख्य रूप से छात्रों और उनकी जरूरतों पर केंद्रित होंगे।’

‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (एनएसयूआई) से जुड़े दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कार्यकर्ता ने कहा कि हालिया जंतर-मंतर प्रदर्शन और संगठन की ओर से की गई भूख हड़ताल ने यह साबित कर दिया है कि छात्र अपनी मांगों के लिए एकजुट हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘डीयू प्रशासन के साथ कई तरह की समस्याएं रही हैं: सीट, पाठ्यक्रम और कई अन्य मुद्दे। वहां अराजकता रही है।’

उन्होंने कहा कि मेट्रो पास और किराये में रियायत जैसी छात्रों की पुरानी मांगें भी चुनाव प्रचार का हिस्सा बन सकती हैं।

उन्होंने कहा, ‘ये बार-बार उठने वाले मुद्दे हैं और निश्चित रूप से इन पर ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, अभी संभावित उम्मीदवार कॉलेजों का दौरा कर रहे हैं और छात्रों से मिलकर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे क्या हैं।’

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) भी कॉलेज स्तर पर छात्रों की समस्याओं का आकलन कर रही है और इसके बाद अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देगी।

पिछले डूसू चुनाव में एनएसयूआई ने एक पद पर जीत हासिल की थी, जबकि एबीवीपी ने तीन पदों पर कब्जा किया था।

भाषा

शुभम दिलीप

दिलीप


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