E20 Petrol Effect on BS4 Engine: ई20 पेट्रोल से वाहनों कितना नुकसान होता है? कांग्रेस सांसद के सवाल पर खुलकर बोले मोदी सरकर के पेट्रोलियम मंत्री, जानिए क्या कहा उन्होंने / Image: AI Generated
नई दिल्ली: E20 Petrol Effect on BS4 Engine ई20 पेट्रोल को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ई20 पेट्रोल की वजह से उनकी गाड़ियों में समस्याएं आ रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों के साथ एक धड़ा ऐसा है जो सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहा है। लेकिन इस बीच मोदी सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने ई20 पेट्रोल से वाहनों को होने वाले नुकसान पर संसद में खुलकर बात की है। तो चलिए जानते हैं कि उन्होंने क्या कहा है?
E20 Petrol Effect on BS4 Engine दरअसल महेसाणा लोकसभा सीट के सांसद हरिभाई पटेल ने ई20 पेट्रोल को लेकर सदन में पूछा कि क्या सरकार ने ई20 पेट्रोल के उपयोग के संबंध में पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों के कुछ मालिकों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं, विशेष रूप से ईंधन दक्षता, इंजन के प्रदर्शन, रखरखाव लागत और समग्र ड्राइविंग अनुभव के संबंध में, का मूल्यांकन किया है? ई20 पेट्रोल के राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले और बाद में इसकी परिचालन उपयुक्तता का मूल्यांकन करने के लिए वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों और उपभोक्ता संगठनों के साथ किसी प्रकार की चर्चा की गई थी? ई20 मानकों की शुरुआत से पहले निर्मित पेट्रोल वाहनों के साथ ई20 ईंधन की अनुकूलता के संबंध में अधिकृत संस्थानों द्वारा किए गए वैज्ञानिक मूल्यांकनों के निष्कर्ष क्या हैं? उस पर क्या सिफारिशें की गई हैं? ई20 ईंधन के उपयोग से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों और सुझावों को प्राप्त करने, उनकी जांच करने और उनका निवारण करने के लिए सरकार द्वारा स्थापित तंत्र क्या है? एथेनॉल सम्मिश्रण को बढ़ावा देने के साथ ही उपभोक्ताओं की वास्तविक चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार द्वारा क्या रणनीति तैयार की गई है?
सांसद हरिभाई पटेल के इस सवाल का लिखित जवाब पेश करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को चरणबद्ध, वैज्ञानिक रूप से मान्य और परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया गया है जिसमें नीति आयोग, ऑटोमोबाइल निर्माता, तेल विपणन कंपनियां (ओएमसीज), भारतीय ऑटोमोटिव अनुसंधान संघ (एआरएआई), भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता सोसायटी (एसआईएएम), भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) और अन्य तकनीकी संस्थाएं शामिल हैं। इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका उपयोग एक सदी से भी अधिक समय से विश्व स्तर पर किया जा रहा है, ब्राजील जैसे देश दशकों से उच्च इथेनॉल मिश्रणों पर प्रचालन कर रहे हैं। भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में प्रयोगिग रूप में हुई, वर्ष 2006 में ई5 पेश किया गया और हालांकि, वर्ष 2013-14 में मिश्रण लगभग 1.53% रहा, लेकिन आवश्यक उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और विनियामक ढांचे के निर्माण के बाद इसे क्रमिक रूप से एक कैलिब्रेटेड तरीके से बढ़ाया गया है। उच्च इथेनॉल मिश्रणों का रोलआउट ऑटोमोबाइल निर्माताओं, एसआईएएम, एआरएआई, कॉमपोनेन्ट निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज) के साथ व्यापक परामर्श के बाद ही किया गया था।
सरकार को ईंधन दक्षता, इंजन प्रदर्शन, रखरखाव लागत और समग्र ड्राइविंग अनुभव संबंधी, ई20 पेट्रोल का उपयोग करने पर, वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संघ या उपभोक्ता संगठनों से कोई भी व्यापक अथवा ठोस शिकायतें नहीं प्राप्त हुई हैं। हालांकि, सरकार ने, मीडिया और सोशल मीडिया पर उठाई गई कुछ चिंताओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिनकी वैज्ञानिक रूप से जांच करवाई गई है। एआरएआई, एसआईएएम, आईओसीएल, आईआईपी और ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा किए गए व्यापक प्रयोगशाला अध्ययनों और क्षेत्र परीक्षणों ने इंजन स्थायित्व, ड्राइव क्षमता, स्टार्ट क्षमता, संक्षारण प्रतिरोध, धातु संगतता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे मापदंडों को शामिल करते हुए पुष्ट किया है कि ई20 निर्धारित मानकों के तहत उपयोग के लिए सुरक्षित है। इन अध्ययनों ने यह भी स्थापित किया कि पुराने वाहनों में प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण भिन्नता या ई20 के कारण प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखाई दिए हैं। इन व्यापक प्रयोगशाला अध्ययनों, क्षेत्र सत्यापन और लोगों के वास्तविक प्रचालन अनुभव ने, ई20 ईंधन के कारण होने वाले वाहन प्रदर्शन संबंधी कोई व्यापक प्रतिकूल प्रभाव स्थापित नहीं किए हैं। सरकार का आकलन न केवल प्रयोगशाला अनुसंधान पर बल्कि राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन के बाद बड़े पैमाने पर प्राप्त अनुभव पर भी आधारित है। भारत में हर दिन खुदरा बिक्री केंद्रों पर लगभग 8 करोड़ वाहन (लगभग 80% पेट्रोल वाहन) आते हैं।
ई15+ मिश्रित पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन साल से भी अधिक समय से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई साल से भी अधिक समय से, व्यापक रूप में किया जा रहा है। 20 करोड़ से भी अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से भी अधिक पेट्रोल कारें इन इथेनॉल मिश्रण पर चल रही हैं, जिनमें मिश्रण के कारण हुई व्यापक इंजन विफलता अथवा वाहन ब्रेकडाउन की किसी भी सत्यापित प्रमाण सहित पुष्टि नहीं की गई है। निर्माता सेवा डेटा पुष्टि करता है कि ई20 ईंधन के कारण से वाहन उपयोग काल में कोई भी प्रतिकूल संक्षारण, घिसाव या कमी नहीं देखी गई है। निर्माता, ई20 ईंधन उपयोग करने वाले वाहनों के लिए वारंटी दायित्वों को मान्यता दे रहे हैं, जो इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता को और अधिक विश्वसनीय बनाता है। एक अग्रणी ओईएम ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ वाहन शामिल हैं जो मूल रूप से ई20-संगत के रूप में प्रमाणित नहीं थे, और किसी में भी ई20-लिंक्ड संक्षारण, प्रतिकूल घिसाव या कॉमपोनेन्ट उपयोग काल में कमी की सूचना नहीं प्राप्त हुई थी। एक अग्रणी 2-पहिया कंपनी ने इसी तरह के क्षेत्र अनुभव की सूचना दी है। हाल ही में एक ओईएम ने बताया कि विस्तारित अवधि में भी ट्रैक करने पर 1.4 करोड़ ई20-प्रचालित वाहनों के डेटा ने इथेनॉल-प्रेरित संक्षारण का कोई प्रमाण नहीं प्रस्तुत किया। एआरएआई ने फिर से पुष्टि की कि वाहन उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले कड़े अंतरराष्ट्रीय मानक सत्यापन से होकर गुजरते हैं।
माइलेज के संबंध में, सरकारी एजेंसियों और ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा किए गए अध्ययनों से संकेत मिलता है कि ईंधन दक्षता ड्राइविंग की स्थिति, ड्राइविंग संबंधी आदतों और वाहन रखरखाव सहित कई कारकों से प्रभावित होती है। कुछ ई10-डिज़ाइन किए गए वाहनों में, ईंधन अर्थव्यवस्था में हुई किसी भी कमी को आम तौर पर लगभग 3-5% तक पाया गया है, वहीं, ई20 उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक विशेषताओं, स्वच्छ कंबशन और सुचारू इंजन प्रदर्शन प्रदान करता है। ई20 के वैज्ञानिक मूल्यांकन और चरणबद्ध रोलआउट के हर चरण में ऑटोमोबाइल निर्माता, कॉमपोनेन्ट आपूर्तिकर्ता, एसआईएएम, एआरएआई, परीक्षण एजेंसियां और तेल विपणन कंपनियां जुड़ी हुई थीं। ई20 को ईंधन प्रणालियों, इंजन टिकाऊपन, ड्राइव क्षमता, उचित धातु अनुकूलता और उत्सर्जन प्रदर्शन के सफल सत्यापन के बाद ही शुरू किया गया था। इन अध्ययनों ने यह भी स्थापित किया कि ई 20 के कारण पुराने वाहनों के प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण भिन्नता या प्रतिकूल टूट-फूट नहीं देखी गई है।
एसआईएएम और एआरएआई के अनुसार, ई20 कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए असेलेरेशन और राइड की गुणवत्ता में सुधार करता है। इथेनॉल की उच्च ऑक्टेन संख्या आधुनिक हाई-कंप्रेशन इंजनों का समर्थन करती है और वाष्पीकरण की उच्च गर्मी से कंबशन दक्षता में सुधार करती है। ई20 में बदलाव से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लाभ भी मिले हैं। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम ने विदेशी विनिमय में 1.97 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत की है, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल को प्रतिस्थापित किया है, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन CO2 उत्सर्जन को कम किया है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपए से अधिक का अंतरण किया गया है। इसके अलावा, ओएमसीज अधिप्राप्ति, मिश्रण, भंडारण, परिवहन और खुदरा वितरण को शामिल करने वाले कड़े मानक प्रचालन प्रक्रियाओं (एसओपीज) का पालन करती हैं। ईंधन की गुणवत्ता का परीक्षण डिस्टिलरी, डिपो और खुदरा बिक्री केंद्रों पर किया जाता है। प्राप्त शिकायतों के आधार पर, ओएमसीज ने मिलावट का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल विनिर्देश-अनुपालित ईंधन ही उपभोक्ताओं तक पहुंचे, खुदरा बिक्री केंद्रों पर 30,000 से भी अधिक गुणवत्ता जांच (पिछले 10-20 दिनों में) की गई हैं। राज्य सरकारों से भी ईंधन मिलावट के किसी भी मामले के खिलाफ शून्य सहिष्णुता अपनाने का अनुरोध किया गया है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज) ने ई20 ईंधन से संबंधित ग्राहकों की शिकायतों और सुझावों सहित ग्राहकों की शिकायतों और सुझावों को प्राप्त करने, जांच करने और हल करने के लिए मजबूत उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किए हैं। ग्राहक अपनी शिकायतों को कई ऑफ़लाइन और ऑनलाइन चैनलों जैसे कि सभी खुदरा बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध शिकायत/सुझाव रजिस्टर, समर्पित टोल-फ्री ग्राहक देखभाल नंबर, कंपनी वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन, ग्राहक संबंध प्रबंधन (सीआरएम) प्रणाली, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ई-मेल और केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से दर्ज कर सकते हैं। त्वरित शिकायत निवारण की सुविधा के लिए डीलरों और संबंधित क्षेत्र अधिकारियों से संपर्क का विवरण, खुदरा बिक्री केंद्रों पर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाते हैं। इन चैनलों के माध्यम से प्राप्त सभी शिकायतों की विधिवत जांच की जाती है और ओएमसीज की स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर हल की जाती है। उपभोक्ताओं को, बिना किसी प्रदर्शन संबंधित समस्या के, सभी पेट्रोल वाहनों के साथ ई20 ईंधन की तकनीकी अनुकूलता और इथेनॉल मिश्रण के पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा लाभों के बारे में शिक्षित करने हेतु सार्वजनिक जागरूकता पहलें भी की जाती हैं। शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से प्राप्त उपभोक्ता प्रतिक्रिया की नियमित रूप से ओएमसीज द्वारा निगरानी की जाती है और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उपभोक्ता विश्वास सुनिश्चित करने के लिए जहां भी आवश्यक हो, उचित सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं।