वजन घटाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता से चिकित्सक एवं अधिकारी चिंतित

वजन घटाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता से चिकित्सक एवं अधिकारी चिंतित

वजन घटाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता से चिकित्सक एवं अधिकारी चिंतित
Modified Date: April 7, 2026 / 06:27 pm IST
Published Date: April 7, 2026 6:27 pm IST

(पायल बनर्जी)

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) कीमतों में कमी आने के साथ ही ‘‘जीएलपी-1’’ आधारित वजन घटाने वाली दवाओं के जेनेरिक संस्करण बाजार में आसानी से मिलने लगे हैं, जिससे चिकित्सक और अधिकारी चिंतित हैं।

चिकित्सक के पर्चों पर ही मिलने वाली दवाएं अब बिना पर्चे के ही खरीदी जा सकती हैं और इनका इलाज के अलावा अन्य उपयोग भी बढ़ रहा है।

अपना वजन जल्दी घटाने के इच्छुक कई लोगों के लिए, त्वरित परिणामों का वादा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर हावी हो रहा है। इस संबंध में महत्वपूर्ण कारकों- जैसे सही खुराक, संभावित दुष्प्रभाव और चिकित्सक की देखरेख की आवश्यकता- को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके बजाय, सोशल मीडिया पर गढ़ी जा रही कहानियां और जुबानी प्रचार के कारण ऐसी दवाओं की मांग बढ़ रही है।

इससे एक समानांतर खुदरा नेटवर्क विकसित हो रहा है, जो विशेषज्ञों से सलाह की आवश्यक प्रक्रिया से गुजरे बिना इन दवाओं का उपयोग करने के लिए कुछ ग्राहकों की तत्परता का लाभ उठाने के लिए तैयार है।

उचित चिकित्सकीय परामर्श के साथ ही ऐसी दवाओं के इस्तेमाल की चेतावनी दिए जाने के बावजूद, ये बिना पर्चे के या ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

एक खुदरा विक्रेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि अनुसूची ‘एच’ की दवाएं केवल पर्चे के आधार पर ही बेची जानी चाहिए, लेकिन इन्हें दुकानों से प्राप्त करना मुश्किल नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘कई मामलों में, फार्मासिस्ट पहली बार दवा बेचने के लिए पर्चे की मांग करते हैं, लेकिन दोबारा बेचने के लिए पर्चे की मांग नहीं करते।’’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि ‘‘जीएलपी-1’’ आधारित वजन घटाने वाली दवाओं के कई दुष्प्रभाव होते हैं। इनमें मतली और उल्टी से लेकर गुर्दे की क्षति और आंत्र अवरोध जैसी गंभीर जटिलताएं शामिल हैं।

भारत में, इन्हें केवल विशेषज्ञ चिकित्सक ही लिख सकते हैं।

हाल ही में भारतीय बाजार में कई प्रकार की ‘‘जीएलपी-1’’ दवाओं के आने और फार्मेसियों, ऑनलाइन मंचों, थोक विक्रेताओं और स्वास्थ्य क्लीनिकों के माध्यम से इनकी आसान उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ने के बाद, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इनकी अनधिकृत बिक्री और प्रचार पर रोक लगाने के लिए अपनी नियामक निगरानी तेज कर दी है।

सरकार ने ऐसी गतिविधियों के खिलाफ सख्त जांच और निगरानी की चेतावनी दी है।

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ डक्टर सप्तर्षि भट्टाचार्य ने बताया कि तिरजेपाटाइड (मौंजारो) और सेमाग्लूटाइड (ओजेम्पिक) इंजेक्शन का पिछले एक दशक से अमेरिका और यूरोप में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है, लेकिन ये भारत में पिछले साल पेश किए गए।

उन्होंने कहा कि इनके बाजार में आने के बाद से, वजन कम करने और रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार करने में इनकी स्पष्ट प्रभावकारिता और सुरक्षा सिद्ध हुई है। हालांकि, इनकी बढ़ती लोकप्रियता ने दुरुपयोग को लेकर चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।

इन दवाओं के इस्तेमाल से जुड़ी एक चिंता इनकी उच्च लागत थी, जिसके कारण इलाज का खर्च वहन कर सकने वाले कुछ ही मरीज़ इन दवाओं का उपयोग कर पाते थे।

भट्टाचार्य ने बताया कि अब यह बाधा दूर हो रही है और पेटेंट की हाल ही में समाप्ति के बाद कई भारतीय कंपनियों ने इसके किफायती संस्करण पेश किए हैं, जिससे इसकी उपलब्धता बढ़ी है और इसका उपयोग काफी बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि आसानी से उपलब्धता के साथ-साथ दुरुपयोग संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं। इन इंजेक्शन को अक्सर वजन बढ़ाने का एक त्वरित उपाय माना जाता है, लेकिन यह चिंताजनक हो सकता है। जीवनशैली में स्थायी बदलाव किए बिना इनका अल्पकालिक उपयोग बंद करने के बाद पुनः वजन बढ़ सकता है।

भाषा अविनाश सुरेश

सुरेश


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