निर्वाचन आयोग को अखिल भारतीय एसआईआर पर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए: उमर अब्दुल्ला

निर्वाचन आयोग को अखिल भारतीय एसआईआर पर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए: उमर अब्दुल्ला

निर्वाचन आयोग को अखिल भारतीय एसआईआर पर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए: उमर अब्दुल्ला
Modified Date: October 27, 2025 / 04:52 pm IST
Published Date: October 27, 2025 4:52 pm IST

श्रीनगर, 27 अक्टूबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों का राष्ट्रव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न होने का इंतजार करना चाहिए।

सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के बाद यहां अपने विधानसभा कार्यालय कक्ष में पत्रकारों से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “बिहार में एसआईआर को लेकर पहले से ही आशंकाएं हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस कवायद से इसे करने वालों को कोई लाभ होगा या नहीं।”

उन्होंने कहा, “बिहार में चुनाव पूरे हो जाने दीजिए, फिर देखेंगे कि इससे कोई फायदा हुआ या नहीं। फिर हम इसे देश के बाकी हिस्सों में लागू करने की बात कर सकते हैं।”

उन्होंने निर्वाचन आयोग को सलाह दी कि वह “देशव्यापी एसआईआर में जल्दबाजी न करे।”

उन्होंने कहा, “अन्यथा, ऐसा लगेगा कि निर्वाचन आयोग ने अपनी स्वतंत्रता खो दी है और वह किसी विशेष राजनीतिक दल के दबाव में काम कर रहा है। हमने ऐसा पहले भी देखा है।”

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा, “जम्मू-कश्मीर में परिसीमन जनता के हित में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दल के हित में किया गया था। जिस तरह से नयी सीटों का बंटवारा और नयी सीटें बनाई गईं, उससे सीधे तौर पर सिर्फ एक राजनीतिक दल को फायदा हुआ। निर्वाचन आयोग को ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए।”

अब्दुल्ला ने इस बात को खारिज कर दिया कि जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की चार सीटों के चुनाव के लिए उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और भाजपा के बीच कोई समझौता हुआ है।

पिछले सप्ताह हुए मतदान में एनसी ने तीन सीटें जीतीं, जबकि भाजपा एक सीट पर जीत हासिल करने में सफल रही।

इस तरह के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “(राज्यसभा चुनावों पर भाजपा के साथ) कोई समझौता नहीं हुआ। कृपया समझें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर में एकमात्र पार्टी है जो भाजपा का सीधा मुकाबला करती है। कोई और ऐसा नहीं कर रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम गुप्त समझौते करने वालों में से नहीं हैं। अगर करना ही होता, तो खुलेआम करते। मैंने वाजपेयी सरकार का बंद दरवाजों के पीछे समर्थन नहीं किया था; मैं राजग में शामिल हुआ था। यह सही था या गलत, यह अलग बात है।”

अब्दुल्ला ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी सरकार और केंद्र के बीच संबंध सौहार्दपूर्ण रहें ताकि शासन प्रभावित न हो।

हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद गनी लोन के इस आरोप पर कि राज्यसभा चुनाव नूरा कुश्ती थी, अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कोई व्यक्ति चुनाव पर टिप्पणी क्यों करेगा जब वह चुनाव में भाग लेने के लिए भी तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा, “पहले उन्हें यह बताना चाहिए कि भाजपा की मदद करने के पीछे उनकी क्या मजबूरी थी। अगर वह मैच फिक्सिंग नहीं चाहते थे तो उन्हें अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहिए था।”

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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