ईडी ने अंतरराज्यीय शराब तस्करी गिरोह पर शिंकजा कसते हुए अरुणाचल में नौ जगहों पर छापे मारे

ईडी ने अंतरराज्यीय शराब तस्करी गिरोह पर शिंकजा कसते हुए अरुणाचल में नौ जगहों पर छापे मारे

ईडी ने अंतरराज्यीय शराब तस्करी गिरोह पर शिंकजा कसते हुए अरुणाचल में नौ जगहों पर छापे मारे
Modified Date: April 27, 2026 / 03:19 pm IST
Published Date: April 27, 2026 3:19 pm IST

ईटानगर, 27 अप्रैल (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अंतरराज्यीय शराब तस्करी और धन शोधन नेटवर्क के खिलाफ जांच के सिलसिले में अरुणाचल प्रदेश में नौ स्थानों पर एक साथ छापे मारे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई यह कार्रवाई एक विस्तृत जांच का हिस्सा है और अब तक की जांच से संकेत मिलता है कि यह गिरोह विभिन्न राज्यों में शराब पर लगने वाले कर के अंतर का फायदा उठाने के लिए अवैध गतिविधियों में संलिप्त था।

उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित शराब को अवैध रूप से असम व अन्य राज्यों में भेजा जा रहा था।

इस सप्ताह चलाए गए इस अभियान में ईटानगर, नाहरलगुन, सेप्पा, जीरो, दापोरिजो, नामसाई और रोइंग जैसे शहरों में छापे मारे गए।

अधिकारियों के अनुसार यह जांच अरुणाचल प्रदेश से असम में शराब के अवैध परिवहन को लेकर असम पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से संबद्ध है।

असम आबकारी विभाग से मिली जानकारी ने मामले को और पुख्ता किया। ईडी ने 17 अक्टूबर 2024 को प्राथमिकी दर्ज की जिसे बाद में अतिरिक्त जानकारी जोड़कर विस्तारित किया गया तथा इसमें 173 और प्राथमिकी शामिल कर ली गईं।

अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष चार फरवरी को तीन प्रमुख संचालकों से जुड़े ठिकानों पर की गई तलाशी में सुनियोजित तरीके से चल रहे नेटवर्क के संकेत मिले थे।

जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह नेटवर्क शराब उत्पादकों, गोदामों और थोक विक्रेताओं की एक पूरी श्रृंखला के जरिए संचालित हो रहा था, जबकि असली मालिकाना हक छिपाने के लिए फर्जी लाइसेंस जैसे हथकंडे अपनाए जा रहे थे।

ताजा छापेमारी में ईडी ने पाया कि कई थोक इकाइयां स्थानीय लोगों के नाम पर जारी फर्जी लाइसेंस के तहत चल रही थीं, जबकि असली नियंत्रण संदिग्ध सरगनाओं के हाथ में था।

वित्तीय जांच में सामने आया कि कुछ बैंक खातों में कुल जमा राशि का 51 से 90 प्रतिशत हिस्सा अज्ञात स्रोतों से आया था।

जांचकर्ताओं ने बिल को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने के एक पैटर्न की भी पहचान की, जिसमें लेन-देन को दो लाख रुपये से कम रखा जाता था ताकि निगरानी से बचा जा सके। एक मामले में, एक ही स्थान पर महज एक महीने के भीतर 1,99,554 रुपये की समान राशि वाले 200 से अधिक बिल तैयार किए गए।

एक अहम खुलासा यह भी रहा कि एक परिसर से 14 मुहरें बरामद हुईं, जिनमें से कुछ अरुणाचल प्रदेश सरकार के आबकारी विभाग की बताई जा रही हैं। संदेह है कि इनका इस्तेमाल शराब के अवैध परिवहन के लिए फर्जी परमिट बनाने में किया गया।

भाषा खारी अविनाश

अविनाश

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