‘आई-पैक’ पर ईडी की छापेमारी ‘सूचना चोरी’ के लिए की गई: अभिषेक बनर्जी
‘आई-पैक’ पर ईडी की छापेमारी 'सूचना चोरी' के लिए की गई: अभिषेक बनर्जी
कोलकाता, 12 जनवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने ‘आई-पैक’ (इंडियन-पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को लेकर केंद्र के साथ पार्टी के टकराव को सोमवार को और तेज करते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी का उद्देश्य जांच करना नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) की ओर से हिसाब बराबर करने के लिए ‘‘राजनीतिक जानकारी चुराना’’ था।
पार्टी के डिजिटल स्वयंसेवकों के सम्मेलन ‘आमी बांग्लार डिजिटल जोद्धा’ को संबोधित करते हुए बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई के इरादे और तरीके दोनों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह छापा एक वैध जांच करने के बजाय राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ एक राजनीतिक विमर्श गढ़ने के लिए तैयार किया गया था।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि तृणमूल को राजनीतिक परामर्श प्रदान करने और उसके आईटी संचालन का प्रबंधन करने वाली आई-पैक से जुड़े परिसरों में आठ जनवरी को की गई तलाशी का उद्देश्य पार्टी की आंतरिक रणनीति तक पहुंच प्राप्त करना था।
उन्होंने कहा, ‘‘ईडी का कहना है कि वे कोयला घोटाले की जांच करने आए थे। वह मामला तीन साल से अधिक पुराना है और उन्होंने इस पूरे समय में किसी को भी तलब नहीं किया। वे आ सकते हैं, लेकिन उनका मकसद सूचना की चोरी था।’’
यह पहली बार है जब उन्होंने एजेंसी पर तृणमूल के आंतरिक डेटा को हथियाने का प्रयास करने का सीधे तौर पर आरोप लगाया।
ईडी ने कथित कोयला घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में आठ जनवरी को साल्ट लेक स्थित आई-पैक के कार्यालय और दक्षिण कोलकाता में उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापे मारे थे। इस दौरान राज्य के कुछ अन्य स्थानों और दिल्ली में भी छापेमारी की गई थी।
उन्होंने सवाल किया कि यदि केंद्रीय जांच एजेंसी संगठन के खिलाफ ‘‘वास्तव में जांच’’ कर रही थी, तो उसने केवल पश्चिम बंगाल में ही आई-पैक के कार्यालय पर छापा क्यों मारा और ‘‘हैदराबाद एवं दिल्ली’’ जैसे स्थानों में ऐसा क्यों नहीं किया।
बनर्जी ने भाजपा पर चयनात्मक तरीके से निशाना साधने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जांच कंपनी के खिलाफ थी तो उसके सभी निदेशकों के आवासों की तलाशी ली जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर मामला एक निदेशक के खिलाफ है, तो बंगाल कार्यालय को क्यों निशाना बनाया गया? यह स्पष्ट रूप से यह धारणा बनाने के लिए किया गया है कि पूरा संगठन ही दोषी है।’’
तृणमूल नेता ने ईडी की कार्रवाई को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के दौरान पार्टी की सहायता करने में आई-पैक की भूमिका से जोड़ा और शुक्रवार को नदिया के ताहेरपुर में एक रैली में लगाए गए अपने आरोप को दोहराया। उन्होंने कहा कि आई-पैक ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं की सहायता के लिए ‘दीदिर दूत’ ऐप जैसे डिजिटल टूल विकसित करने में पार्टी की मदद की थी।
बनर्जी ने कहा, ‘‘क्योंकि उन्होंने एसआईआर के दौरान लोगों की मदद की और तृणमूल के लिए काम किया, इसलिए ईडी को उनके खिलाफ छापेमारी करने भेजा गया। एक तरफ निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल लोगों के अधिकारों को छीनने के लिए किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ ईडी का इस्तेमाल लोकतंत्र का गला घोंटने के लिए किया जा रहा है।’’
ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान अधिकारियों के काम में बाधा पहुंचाने और आपत्तिजनक दस्तावेजों को हटाने का आरोप लगाया है, जिसे तृणमूल ने सिरे से खारिज कर दिया है। एजेंसी ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
फाइलों को हटाने का सीधा जिक्र किए बिना अभिषेक बनर्जी ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने (ममता ने) उसी भाषा में जवाब दिया, जो उन्होंने इस्तेमाल की थी। अन्य राज्यों में नेताओं को पाला बदलने के लिए धमकाया जाता है। लेकिन यहां यह तरीका काम नहीं करता।’’
बनर्जी ने अपने राजनीतिक हमले को और व्यापक बनाते हुए भाजपा पर बांग्ला भाषा और हस्तियों का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय के उस कथित बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने बंगालियों को ‘बांग्लादेशी’ कहा था और उन्होंने 2019 में भाजपा की एक रैली के दौरान समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़े जाने की घटना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर विद्यासागर न होते, तो (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी या (केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह को अपना नाम लिखना भी नहीं आता।’’
हालांकि, बनर्जी ने दोनों गुजराती नेताओं और बांग्ला भाषा के बीच संबंध के बारे में विस्तार से नहीं बताया।
बनर्जी ने ‘डिजिटल योद्धाओं’ से इस कथित झूठे विमर्श का मुकाबला करने का आग्रह किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया मंचों के जरिए लोगों को पूरे मामले की जानकारी देकर एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को उजागर करने की अपील की।
भाषा सिम्मी दिलीप
दिलीप

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