न्यूजक्लिक के खिलाफ धन शोधन मामला रद्द करने संबंधी आदेश के खिलाफ न्यायालय जाएगी ईडी

न्यूजक्लिक के खिलाफ धन शोधन मामला रद्द करने संबंधी आदेश के खिलाफ न्यायालय जाएगी ईडी

न्यूजक्लिक के खिलाफ धन शोधन मामला रद्द करने संबंधी आदेश के खिलाफ न्यायालय जाएगी ईडी
Modified Date: June 11, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: June 11, 2026 8:03 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) नियमों के उल्लंघन के आरोप में समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ और उसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ धन शोधन का मामला रद्द कर दिया गया था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

ईडी ने कहा कि उच्च न्यायालय के 29 मई के आदेश में, अभियोजन पक्ष की ओर से दी गई कई अहम दलील को ‘‘नजरअंदाज किया गया या उन पर ध्यान नहीं दिया गया।’’

न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने 41 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई की ओर से न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ के खिलाफ प्राथमिकी को जारी रखना ‘‘कानूनी प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग’’ है, और जब मूल अपराध से जुड़ी प्राथमिकी रद्द हो गई हो, तो इस मामले में ईडी का मुकदमा बंद किये जाने योग्य है।

आदेश में कहा गया है, ‘‘आपराधिक साजिश होने के कोरे दावों के अलावा, ऐसा कोई भी आरोप या सबूत नहीं है जो पीएमएलए (धन शोधन रोकथाम अधिनियम) की धारा 4 के तहत सजा-योग्य अपराध के होने का जरा भी संकेत देता हो।’’

ईडी के अधिकारियों ने कहा कि वे उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करेंगे।

उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह फैसला इस आधार पर लिया गया है कि कोई पीड़ित नहीं है।

अधिकारियों ने कहा कि ईडी और आर्थिक अपराध इकाई का मामला यह है कि निवेशकों की असलियत, धन की प्रकृति और स्रोत, निवेश के वाणिज्यिक स्वरूप और शेयरों के मूल्य के बारे में अधिकारियों और बैंकों को ‘‘गलत जानकारी’’ दी गई थी।

उन्होंने कहा कि अदालत ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि धोखाधड़ी को केवल निजी क्षेत्र तक ही सीमित रखने की जरूरत नहीं है, बल्कि सरकारी अधिकारियों को गलत जानकारी देकर कोई काम करवाना भी धोखाधड़ी माना जा सकता है, बशर्ते कि उससे किसी को गलत तरीके से फायदा या नुकसान हुआ हो।

ईडी अधिकारियों का मानना ​​है कि मामला रद्द करने की कार्यवाही के दौरान उच्च न्यायालय के समक्ष मुख्य मुद्दा यह था कि क्या लगाए गए आरोपों को सच मानने पर अपराध का कोई मामला बनता है।

उन्होंने कहा कि फैसला इस बात पर आधारित है कि क्या ईडी ने आरोपों को निर्णायक रूप से साबित कर दिया था और क्या आरोप अंततः साबित किये जा सकते थे।

अधिकारियों ने बताया कि ईडी के जांचकर्ताओं ने कई लोगों के ईमेल जुटाये और उनके बयान दर्ज किये – जिनमें पुरकायस्थ के साथ काम करने वाले लोग भी शामिल हैं – ताकि यह साबित किया जा सके कि पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड (न्यूजक्लिक का स्वामित्व रखने वाली कंपनी) सरकारी मंजूरी ‘‘नहीं लेते हुए’’ एफडीआई हासिल करना चाहती थी।

उन्होंने दावा किया कि पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड का उद्देश्य बदलकर इसे एक डिजिटल कंपनी बनाने का फैसला किया गया, इसके लिए अलग-अलग इंतजाम किये गए और वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से निवेश हासिल किया गया।

सितंबर 2021 में ईडी ने न्यूजक्लिक और पुरकायस्थ के परिसरों पर छापेमारी की थी। इस जांच के तहत, एजेंसी ने दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में स्थित 4.52 करोड़ रुपये मूल्य का एक फ्लैट कुर्क किया था, जो पुरकायस्थ से संबंधित है। साथ ही, 41 लाख रुपये की सावधि जमा राशि भी जब्त की गई थी।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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