पुंछ में बादल फटा: एसयूवी हटाने बाहर निकला व्यक्ति लौटा तो मलबे में दबे मिले परिवार के आठ सदस्य
पुंछ में बादल फटा: एसयूवी हटाने बाहर निकला व्यक्ति लौटा तो मलबे में दबे मिले परिवार के आठ सदस्य
जम्मू, 19 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की सुरनकोट तहसील के सुदूरवर्ती लोअर मुरान गांव में रहने वाले बुजुर्ग मोहम्मद लतीफ के लिए एहतियात के तौर पर आधी रात में उठाया गया एक कदम जिंदगी भर का गम बन गया।
लतीफ शनिवार देर रात करीब साढ़े तीन बजे, जब मूसलाधार बारिश के बीच अपनी ‘एसयूवी’ कार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए घर से बाहर निकले, उसके कुछ ही मिनट बाद बादल फटने से आए मलबे, विशाल पत्थरों और बाढ़ के तेज बहाव ने नाले के किनारे बने उनके तीन मंजिला मकान को ढहा दिया, जिसमें उनके परिवार के आठ सदस्य मलबे में दब गए।
लतीफ महज संयोग से बच गए।
उनका बड़ा बेटा घटना के समय जम्मू में था इसलिए वह भी बच गया लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों को बचने का मौका नहीं मिल सका।
सुबह होते ही तबाही का मंजर साफ हो गया।
जिस जगह कभी परिवार का घर हुआ करता था, वहां अब बिखरा हुआ मलबा, मुड़े हुए लोहे के सरिये और पत्थरों का ढेर नजर आ रहा था।
दिन निकलने तक नाला सामान्य दिखाई देने लगा था, मानो कुछ घंटे पहले उसी के तेज बहाव ने तीन मंजिला मकान को अपने साथ बहा न ले गया हो।
अपना दुख किनारे रखकर लतीफ गांव के लोगों और राहत एवं बचावकर्मियों के साथ मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुट गए।
फावड़ों और रस्सियों की मदद से वह पूरे दिन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में लगे रहे, इस उम्मीद के साथ कि शायद कोई जीवित मिल जाए।
हालांकि, तलाश का नतीजा सिर्फ दुख लेकर आया।
शाम तक बचाव दल मलबे से 60 वर्षीय बानो बी और दो वर्षीय सोफियान यासर के शव बरामद कर सका।
वहीं, लतीफ की पत्नी नूर सफिया, बेटे सज्जाद अहमद, हकनवाज, शहनवाज और मोहम्मद अकरम व बहू खालिदा कौसर की तलाश जारी रही।
लतीफ के रिश्तेदार मोहम्मद असलम ने बताया कि मूसलाधार बारिश के बीच लतीफ देर रात बोलेरो गाड़ी को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने के लिए घर से निकले थे।
असलम ने बताया कि लतीफ पास में रहने वाले एक रिश्तेदार के घर चले गए थे क्योंकि उनकी पत्नी ने उन्हें बारिश थमने और सुबह होने के बाद ही घर लौटने की सलाह दी थी।
बरामद दोनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि बादल फटने की घटना इतनी भीषण थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से कई मकान जमींदोज हो गए, सड़कें बह गईं और कई गांवों का जिले के अन्य हिस्सों से संपर्क टूट गया।
लतीफ की कहानी सुरनकोट में मची तबाही की सबसे मार्मिक घटनाओं में से एक बनकर सामने आई है।
यह इस बात की याद दिलाती है कि प्रकृति के प्रकोप के सामने कभी-कभी जीवन और मौत के बीच का फासला सिर्फ कुछ मिनटों का होता है।
पास के सांगला गांव में अब्दुल हमीद, उनकी पत्नी, बेटी और बहन तेज बहाव में बह गए।
राहत एवं बचाव दल के पूरे दिन चले अभियान के बाद एक महिला का शव बरामद किया।
हमीद का मकान पूरी तरह बह गया और उसका कोई निशान नहीं बचा।
परिवार के अन्य लापता सदस्यों की तलाश जारी है।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
प्रशांत

Facebook


