नाबालिग से बलात्कार के मामले में बुजुर्ग को 20 साल का कठोर कारावास

नाबालिग से बलात्कार के मामले में बुजुर्ग को 20 साल का कठोर कारावास

नाबालिग से बलात्कार के मामले में बुजुर्ग को 20 साल का कठोर कारावास
Modified Date: March 26, 2026 / 10:25 pm IST
Published Date: March 26, 2026 10:25 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने पिछले साल एक नाबालिग के साथ बलात्कार करने के मामले में 72 वर्षीय एक व्यक्ति को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने कहा कि पीड़िता उसे दादा कहकर संबोधित करती थी, इसके बावजूद, उसने अपनी हवस मिटाने के लिए उसका शोषण किया।

विश्वासघात और सामाजिक मूल्यों के पतन को रेखांकित करते हुए, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया ने कहा कि इस अपराध ने उस सामाजिक धारणा को चकनाचूर कर दिया कि बड़े-बुजुर्ग बच्चों की रक्षा करते हैं।

न्यायमूर्ति पुनिया उस व्यक्ति के खिलाफ सजा पर बहस सुन रही थीं, जिसे बलात्कार के दंड प्रावधान और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था।

अदालत ने 24 मार्च को दिए गए अपने आदेश में कहा कि पीड़िता की उम्र मात्र आठ वर्ष थी, इसलिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कारक दोषी और पीड़िता की तुलनात्मक आयु थी।

अदालत ने कहा, ‘‘पीड़िता उसे ‘दादा’ कहकर बुलाती थी, लेकिन वह अपनी वासना को पूरा करने के लिए उसका शोषण करता था।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इस न्यायालय की राय में, यह हमला न केवल बच्ची पर है, बल्कि यह हमारे समाज में बुजुर्गों के प्रति मौजूद आदर को भी ठेस पहुंचाता है, और परिवारों और समुदायों की नींव को कमजोर करता है। यह घटना हमारे उस विश्वास को भी तोड़ देती है कि बुजुर्ग बच्चों की रक्षा करते हैं।’’

अदालत ने बचाव पक्ष के उस अनुरोध को खारिज कर दिया जिसमें उसे सजा दिये जाने में नरमी बरते जाने के लिए कहा था।

अदालत ने उसे पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न के लिए दंड) के तहत अपराध करने के लिए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

बीस साल की कारावास की सजा के अलावा, अदालत ने पीड़िता को मुआवजे की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अदालत ने कहा, ‘‘ यह सच है कि मुआवजा किसी पीड़ित बच्चे द्वारा झेले गए आघात या दर्द को दूर नहीं कर सकता, न ही उसके खोए हुए बचपन को वापस ला सकता है या अपराधी के कृत्यों से हुए गहरे भावनात्मक घावों को पूरी तरह से भर सकता है।’’

अदालत ने कहा कि भले ही मुआवजा पूरी तरह न्याय नहीं दिला सकता, लेकिन यह कुछ हद तक पीड़िता के जीवन को फिर से संभालने में मदद कर सकता है और यह पुनर्वास और शिक्षा में उसके लिए सहायक हो सकता है।

इसने पीड़िता को 13.5 लाख रुपये का मुआवजा दिये जाने का निर्देश दिया।

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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