Election Commission on SIR | Photo Credit: IBC24
नयी दिल्ली: Election Commission on SIR: SIR विवाद पर चुनाव आयोग (Election Commission) ने बुधवार को प्रेस नोट जारी किया है। जिसमें आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों पर सफाई दी है और कहा कि असहमतियां प्रक्रिया का हिस्सा हैं लेकिन सारे फैसले सहमति से लिए गए हैं। आयोग का कहना है कि चुनाव आयोग के भीतर किसी भी मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
Election Commission on SIR चुनाव आयोग (Election Commission) ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य बात है। आयोग के मुताबिक, निर्णय लिए जाने से पहले अधिकारी और सदस्य अपने सवाल, सुझाव या आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि अंतिम फैसले आयोग के स्तर पर लिए जाते हैं और SIR समेत सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली है।
दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि एसआईआर के दौरान 10 महीने में 14 बार दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के कदमों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form 6 में बदलाव और वोटर डेटा से जुड़े मामलों को लेकर थीं।
इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि व्यक्तिगत राय को आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। आयोग के मुताबिक पिछले एक साल में कई फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और चुनावी सुधारों से जुड़े कदम भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं।आयोग ने SIR समेत मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी दी है। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, ताकि पात्र मतदाता सूची में बने रहें और अपात्र नामों को हटाया जा सके।