निर्वाचन आयुक्तों का अलग-अलग विचार जाहिर करना सच्चे लोकतंत्र का प्रतीक : भाजपा

निर्वाचन आयुक्तों का अलग-अलग विचार जाहिर करना सच्चे लोकतंत्र का प्रतीक : भाजपा

निर्वाचन आयुक्तों का अलग-अलग विचार जाहिर करना सच्चे लोकतंत्र का प्रतीक : भाजपा
Modified Date: September 23, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: September 23, 2026 9:20 pm IST

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि आधिकारिक विचार-विमर्श के दौरान तीनों निर्वाचन आयुक्त के अलग-अलग विचार जाहिर करने से जुड़ी खबरें दिखाती हैं कि निर्वाचन आयोग लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहा है।

सत्तारूढ़ दल ने यह भी कहा कि ये खबरें विपक्ष के उन आरोपों को भी गलत साबित करती हैं, जिनमें निर्वाचन आयोग को ‘तानाशाह’ कहा गया था।

भाजपा की यह प्रतिक्रिया ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित उस खबर को लेकर उपजे विवाद के बीच आई है, जिसमें दावा किया गया है कि तीन-सदस्यीय निर्वाचन आयोग में दो निर्वाचन आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर बार-बार सवाल उठाए गए थे।

खबर के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीने में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना लिये या जारी किए गए थे।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, “आधिकारिक विचार-विमर्श के दौरान निर्वाचन आयुक्तों के अलग-अलग विचार जाहिर करने से जुड़ी खबरें सच्चे लोकतंत्र को दर्शाती हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया, “अगर चुनाव कराने वाले निर्वाचन आयुक्तों के बीच कोई संवाद और विचारों का आदान-प्रदान नहीं होता, तो विपक्षी दल ‘तानाशाही’ का आरोप लगाएंगे और उन्हें सरकार की ‘हां में हां मिलाने वाला’ बताएंगे।”

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की कांग्रेस की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए पात्रा ने कहा, “कांग्रेस नेता लोकसभा अध्यक्ष से लेकर सीईसी तक, सभी को पद से हटवाना चाहते हैं, लेकिन असल में देश की जनता विपक्ष और कांग्रेस को लगातार हटा रही है।”

उन्होंने कहा, “यही भारत की खूबसूरती है। देश ने आपातकाल देखा है। लोग जानते हैं कि तब क्या हुआ था।”

पात्रा ने कहा कि इस मामले में निर्वाचन आयोग की ओर से जारी बयान दर्शाता है कि न तो आयोग और न ही भारत की कोई अन्य संवैधानिक संस्था “तानाशाही शासन” के अधीन है।

उन्होंने कहा, “इससे पता चलता है कि निर्वाचन आयोग और अन्य सभी संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं और देश के लोकतंत्र को बनाए रख रही हैं।”

पात्रा ने कहा कि विपक्षी दल निर्वाचन आयोग और सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “निर्वाचन आयोग और सरकार को तानाशाह बताने वाले विपक्षी दल आज अपने ही जाल में फंस गए हैं।”

पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को “बदनाम करने का अभियान” चला रहे हैं, क्योंकि वे भाजपा की ‘विकास की राजनीति’ को हराकर चुनाव नहीं जीत पा रहे हैं।

उन्होंने कांग्रेस के “वोट चोरी” के आरोप को भी खारिज कर दिया और कहा कि साल 2014 से चुनाव “बहुत सुचारु रूप से” हो रहे हैं, जिनमें भाजपा समेत कई पार्टियों को हार-जीत दोनों का सामना करना पड़ा है।

पात्रा ने कहा, “जहां तक एसआईआर का सवाल है, उच्चतम न्यायालय ने सीधे तौर पर इसकी वैधता को बरकरार रखते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। भले ही आपको उच्चतम न्यायालय, निर्वाचन आयोग या ईवीएम पर भरोसा न हो, लेकिन आपको उन लोगों पर तो भरोसा होना ही चाहिए, जिनके वोट तय करते हैं कि चुनाव में कौन जीतेगा और कौन हारेगा।”

उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र के लिए सबसे अच्छा समय है, जिसमें निर्वाचन आयोग जैसी सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं में भी बहस होती हैं।”

पात्रा ने दावा किया कि अतीत में निर्वाचन आयुक्त कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं और यहां तक कि उन्हें मंत्री भी बनाया गया था।

उन्होंने कहा, “कदाचार और घोटालों की शुरुआत कांग्रेस के भीतर हुई। अनियमितताएं इस पार्टी की पहचान रही हैं।”

कांग्रेस के इस आरोप के बारे में पूछे जाने पर कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश की जा रही है, पात्रा ने कहा, “हम किसी को बचाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। हम लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हम संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “निर्वाचन आयोग से लेकर न्यायपालिका तक, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने भारत की किसी भी संवैधानिक संस्था को नहीं बख्शा है और बेबुनियाद दावों के जरिये उन्हें बदनाम करने की कोशिश की है।”

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश


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