भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आपातकाल एक काला अध्याय : भगत सिंह कोश्यारी

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आपातकाल एक काला अध्याय : भगत सिंह कोश्यारी

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आपातकाल एक काला अध्याय : भगत सिंह कोश्यारी
Modified Date: June 26, 2026 / 05:17 pm IST
Published Date: June 26, 2026 5:17 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) महाराष्ट्र और गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का ‘काला अध्याय’ करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ ​​के तौर पर याद किया जाना चाहिए।

कोश्यारी दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में प्रोफेसर सुधीर सिंह द्वारा लिखी किताब ‘‘डेमोक्रेसी एंड ह्यूमन राइट्स इन इंडिया: रिफ्लेक्शन्स फ्रॉम इमरजेंसी (1975–1977)’’ का विमोचन करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने आपातकाल के दौरान जेल में बिताए समय को याद करते हुए कहा, ‘‘25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर याद किया जाना चाहिए। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय है और आने वाली पीढ़ियों को इससे मिले सबक हमेशा याद रखने चाहिए।’’

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को बनाए रखने के लिए आपातकाल को याद रखना जरूरी है।

सिंह ने कहा, ‘‘नयी पीढ़ी के लिए भारतीय लोकतंत्र के इस काले अध्याय को समझना जरूरी है। इस किताब का विमोचन किसी जख्म को फिर से खोलने जैसा है, लेकिन अगर कोई देश अपने घावों को भूल जाता है, तो उनके दोहराए जाने का खतरा बना रहता है।’’

यह किताब 1975-77 के आपातकाल का संवैधानिक संस्थाओं, नागरिक स्वतंत्रताओं, लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था और मानवाधिकारों पर पड़े असर का ऐतिहासिक और राजनीतिक कोण से विश्लेषण करती है।

लेखक सुधीर सिंह ने कहा कि 19 महीने के आपातकाल के दौरान लोकतंत्र ‘‘काले बादलों के साये में’’ रहा।

भाषा धीरज संतोष

संतोष


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