प्रख्यात दार्शनिक और नारायण गुरुकुल के प्रमुख मुनि नारायण प्रसाद का निधन
प्रख्यात दार्शनिक और नारायण गुरुकुल के प्रमुख मुनि नारायण प्रसाद का निधन
तिरुवनंतपुरम, 25 अप्रैल (भाषा) प्रख्यात दार्शनिक एवं आध्यात्मिक गुरु और ‘नारायण गुरुकुल’ के प्रमुख मुनि नारायण प्रसाद का शनिवार तड़के निधन हो गया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
वह 87 वर्ष के थे।
वरकला स्थित दार्शनिक और शैक्षणिक संस्था ‘नारायण गुरुकुल’ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रसाद ने यहां वेंजारामूडु के एक निजी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अंतिम सांस ली।
‘नारायण गुरुकुल’ समाज सुधारक संत नारायण गुरु की शिक्षाओं से प्रेरित है।
प्रसाद इंजीनियरिंग में स्नातक थे। उन्हें 2024 में पद्म श्री और साहित्य एवं दर्शन में उनके योगदान के लिए केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने ‘नारायण गुरुकुल’ से जुड़ने से पहले राज्य सरकार के एक विभाग में सेवाएं दीं। ‘नारायण गुरुकुल’ की स्थापना 1923 में श्री नारायण गुरु के शिष्य नटराज गुरु ने की थी।
गुरुकुल के तत्कालीन प्रमुख और प्रसिद्ध दार्शनिक नित्य चैतन्य यति के निधन के बाद प्रसाद इसके प्रमुख बने थे।
उन्होंने एक प्रख्यात विद्वान और प्रखर लेखक के रूप में विभिन्न विषयों, विशेष रूप से दर्शन और आध्यात्मिकता पर कई पुस्तकें लिखीं। मुनि नारायण प्रसाद के निधन पर विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने शोक संदेश में कहा कि मुनि नारायण प्रसाद, गुरु की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार, उनके साहित्यिक कार्यों की व्याख्या करने और प्रभावशाली व्याख्यान देने के लिए जाने जाते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पास गूढ़ दार्शनिक विचारों को सरल भाषा में समझाने की अद्भुत क्षमता थी।
विजयन ने कहा कि अपने विचारों और आचरण में मानवतावाद तथा समानता का भाव रखने वाले प्रसाद ने कई लोगों की सोच को प्रभावित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘मुनि नारायण प्रसाद के निधन के साथ हमने एक ऐसे शिक्षक को खो दिया है, जिसने समाज को सोचना सिखाया।’
भाषा प्रचेता सिम्मी
सिम्मी

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