ऋषिकेश के पशुलोक गंगा बैराज में सी-प्लेन के संचालन का पर्यावरणविद ने विरोध किया
ऋषिकेश के पशुलोक गंगा बैराज में सी-प्लेन के संचालन का पर्यावरणविद ने विरोध किया
ऋषिकेश, 16 अप्रैल (भाषा) पर्यावरणविद विनोद प्रसाद जुगलान ने साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऋषिकेश स्थित पशुलोक गंगा बैराज जलाशय में सी-प्लेन उतारे जाने का विरोध करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इससे न केवल पर्यावरण के संरक्षण से जुड़े कार्यों में बाधा पैदा होगी, बल्कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा।
नमामि गंगे परियोजना की देहरादून जिला समिति के सदस्य जुगलान ने कहा कि सी-प्लेन संचालन पर्यावरण संरक्षण के नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
उन्होंने कहा, “यहां मगरमच्छ, खतरे की जद में आ चुकी नस्लों में सूचीबद्ध गैंगेटिक डॉल्फिन और गोल्डन महाशीर बड़े पैमाने पर पाई जाती हैं। सी-प्लेन के संचालन से पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में न केवल बाधा उत्पन्न होगी, बल्कि स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा। इसकी वजह से मानव वन्यजीव टकराव बढ़ेगा।”
जुगलान ने कहा कि सी-प्लेन के उड़ान भरने और उतरने के दौरान उसके इंजन से उत्पन्न तीव्र हलचल एवं शोर से गैंगेटिक डॉल्फिन, मगरमच्छ, कछुओं तथा गोल्डन महाशीर सहित कई जलीय जीवों का जीवन चक्र बुरी तरह से प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि इससे राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के उन वन्यजीवों की जीवनचर्या पर भी असर पड़ेगा, जो यहां हर दिन अपनी प्यास बुझाने आते हैं।
जुगलान ने आशंका जताई कि जब जंगली हाथियों को यहां पानी पीने में दिक्कत होगी, तो वे इधर-उधर भटकेंगे, जिससे नीलकंठ महादेव को जाने वाले मार्ग पर आवागमन प्रभावित होगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ेंगी।
तीर्थाटन के विकास पर जोर देते हुए पर्यावरणविद ने कहा कि गंगा सिर्फ नदी मात्र ही नहीं, हमारी पौराणिक सांस्कृतिक धरोहर है और सी-प्लेन के जरिये इसे साहसिक पर्यटन स्थल में बदलने से दुनियाभर के करोड़ों लोगों की आस्था भी प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण के केदार खंड में ऋषिकेश और यहां की कई नदियों का जिक्र है, लेकिन इनमें से कई जैसे रंभा, चंद्र भागा और सरस्वती नदियां उपेक्षा के कारण पहले ही अपना स्वरूप खो चुकी हैं।
सरकार से सी-प्लेन के संचालन की योजना पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए जुगलान ने कहा कि इसे स्थगित कर देना चाहिए, ताकि यहां के स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र एवं इसमें जीवित रहने वाले जीवों को बचाया जा सके।
पशुलोक गंगा बैराज जलाशय में छह अप्रैल को सी-प्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग की गई। राज्य सरकार का मानना है कि सी-प्लेन सेवा शुरू होने से चारधाम यात्रा, साहसिक पर्यटन और सप्ताहांत यात्रा को बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक अब कम समय में सीधे ऋषिकेश व आसपास के प्रमुख स्थलों तक पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार की योजना भविष्य में इस सेवा को टिहरी झील, नैनीताल झील और अन्य जलाशयों तक विस्तार देने की है, ताकि उत्तराखंड देश का प्रमुख सी-प्लेन गंतव्य बन सके।
भाषा
सं दीप्ति पारुल
पारुल

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