न्यायसंगत विकास वही जो पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल हो: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
न्यायसंगत विकास वही जो पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल हो: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, 18 अप्रैल (भाषा) प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायसंगत विकास वही है जो पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल हो।
उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की प्रगति पारिस्थितिक स्थिरता और ऊर्जा न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि देश को ‘‘विकास की हमारी अकांक्षा और हरित भविष्य के प्रति हमारी निष्ठा’’ के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने के लिए तैयार और सुसज्जित होना चाहिए।
भारत का विकास पारिस्थितिक स्थिरता और ऊर्जा न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को ‘‘विकास की हमारी अकांक्षा और हरित भविष्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता’’ के बीच एक नाजुक संतुलन स्थापित करने के लिए तैयार और सुसज्जित होना चाहिए।
‘सतत ऊर्जा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: भारत के लिए 2047 का एजेंडा’ को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि 2047 के लिए भारत की परिकल्पना न्याय पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी राय में, आर्थिक विकास को पारिस्थितिक संवेदनशीलता के साथ सामंजस्य बिठाना आवश्यक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक राष्ट्र के रूप में हम अब भी विकास के पथ पर अग्रसर हैं और इसलिए हम पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति को दो विकल्पों के रूप में नहीं देख सकते।’’
प्रधान न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि ऊर्जा न्याय विकसित देशों से आयातित कोई ‘विदेशी अवधारणा’ नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यह वह नैतिक संरचना है जो हमारे जैसे एक उभरते हुए राष्ट्र को प्रत्येक नागरिक के स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी और एक रहने योग्य भविष्य संबंधी अधिकारों से समझौता किए बिना विकास करने की अनुमति देती है।’’
इस संतुलन के संवैधानिक आधार पर प्रकाश डालते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों अनुच्छेद 21 में निहित हैं और ‘‘हमारे संवैधानिक ढांचे की खूबी इस बात पर जोर देने में निहित है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए।’’
हाल के एक फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अदालत ने एक अर्धसैनिक अस्पताल तक सड़क के निर्माण की इसके बावजूद अनुमति दी कि उसके लिए 700 पेड़ काटने की आवश्यकता थी लेकिन 185 एकड़ में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और 1.75 लाख पेड़ लगाने का आदेश दिया। उन्होंने इसे ‘‘संतुलित दृष्टिकोण’’ बताया।
भाषा अमित धीरज
धीरज

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