अमर्त्य सेन को एसआईआर नोटिस भेजने वाले ‘बांग्ला विरोधियों’ का नामोनिशान मिटा दें: अभिषेक बनर्जी

अमर्त्य सेन को एसआईआर नोटिस भेजने वाले ‘बांग्ला विरोधियों’ का नामोनिशान मिटा दें: अभिषेक बनर्जी

अमर्त्य सेन को एसआईआर नोटिस भेजने वाले ‘बांग्ला विरोधियों’ का नामोनिशान मिटा दें: अभिषेक बनर्जी
Modified Date: January 6, 2026 / 09:12 pm IST
Published Date: January 6, 2026 9:12 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

रामपुरहाट, छह जनवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को दावा किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को एसआईआर संबंधी सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। उन्होंने पार्टी समर्थकों से “पश्चिम बंगाल के सियासी परिदृश्य से भाजपा का नामोनिशान मिटाने” और आगामी विधानसभा चुनावों में 250 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

हालांकि, सेन के परिवार के एक सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उन्हें निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी सुनवाई के संबंध में अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है।

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अभिषेक ने बीरभूम जिले के रामपुरहाट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बंगाल की जनता का जानबूझकर बार-बार अपमान कर रही है और अब उसने एसआईआर की कवायद के नाम पर राज्य को निशाना बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ सांठगांठ कर ली है।

उन्होंने कहा, “यहां आते समय मुझे बताया गया कि वैश्विक स्तर पर हमारे देश का कद बढ़ाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन को एसआईआर संबंधी सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। अभिनेता देव और क्रिकेटर मोहम्मद शमी जैसे कई प्रतिष्ठित लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं, जो क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा थे।”

अभिषेक ने कहा, “इस अपमान का जवाब देने का एकमात्र तरीका बीरभूम जिले की सभी 11 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना है।”

पश्चिम बंगाल में 2021 में हुए विधासनभा चुनावों में दुबराजपुर सीट को छोड़कर बीरभूम जिले की बाकी 10 सीटों पर तृणमूल उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी। दुबराजपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार विजयी रहे थे।

अभिषेक ने कहा, “पश्चिम बंगाल से बांग्ला-विरोधी भाजपा का नामोनिशान मिटा दें, जिसने लोगों को बार-बार इस तरह की बदनामी झेलने के लिए मजबूर किया है।”

इस बीच, सेन के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री का गणना फॉर्म विधिवत भरा और जमा किया गया था।

उक्त सदस्य ने कहा, “सेन की मां का नाम भी 2002 की मतदाता सूची में था और उन्होंने (सेन ने) पहले संपन्न एक चुनाव में अपना वोट भी डाला था। हम जिले के निर्वाचन अधिकारियों से इस संबंध में पता करेंगे।”

अभिषेक ने पिछले साल सात दिसंबर को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भगवद गीता के श्लोकों के सामूहिक पाठ के दौरान आयोजन स्थल के पास मांसाहार व्यंजन बेचने वाले विक्रेता पर हमले की घटना का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “अगर भगवा खेमा राज्य में मात्र 70 सीटें जीतकर एक गरीब विक्रेता और खाने-पीने के आपके विकल्प पर हमला कर सकता है, तो जरा सोचिए सत्ता में आने पर वे क्या कर सकते हैं। मेरा मानना ​​है कि इस बार हमारा लक्ष्य 250 सीटें जीतना होना चाहिए।”

अभिषेक ने कहा, “हर सीट पर अपनी जीत का अंतर बढ़ाएं और भाजपा उम्मीदवारों को इस तरह से हराएं कि उनकी जमानत राशि तक जब्त हो जाए, ताकि दिल्ली और गुजरात में उनके आकाओं को संदेश मिल जाए।”

तृणमूल नेता ने पात्र मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि उनके नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जाएंगे।

अभिषेक ने उन मतदाताओं को फॉर्म भरने और अपने नाम दोबारा शामिल करवाने की सलाह दी, जिनके नाम मसौदा मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, “जिन लोगों को सुनवाई से जुड़े नोटिस मिले हैं, वे दस्तावेजीकरण संबंधी समस्याओं को लेकर सुनवाई केंद्रों के बाहर स्थापित तृणमूल सहायता शिविरों से संपर्क कर सकते हैं।”

रैली के बाद अभिषेक रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने सोमवार को एक बेटे को जन्म देने वाली सोनाली खातून से मुलाकात कर उसे बधाई दी।

बीरभूम जिले की प्रवासी महिला सोनाली को पिछले साल भारत से बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया था। हालांकि, बाद में शीर्ष अदालत के आदेश के बाद उसे भारत वापस लाया गया।

अभिषेक ने अस्पताल परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “मुझे पूरा यकीन है कि भाजपा को अंततः उस मां के आंसुओं के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसे हमारे सुरक्षाबलों और बांग्लादेश के अधिकारियों के हाथों असहनीय शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी, सिर्फ इसलिए कि उसने बांग्ला में बात की।”

अभिषेक इसके बाद तारापीठ काली मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे।

भाषा पारुल वैभव

वैभव


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