नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) केंद्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि विशेषज्ञों ने उन दिशानिर्देशों को शिथिल करने के खिलाफ राय दी है जिसके तहत ट्रांसजेंडर, समलैंगिकों और यौनकर्मियों के रक्तदान पर प्रतिबंध है।
केंद्र ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ को बताया कि पिछले साल मई में उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद, विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर पुनर्विचार किया है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा, ‘इस बात पर पुनर्विचार किया गया है कि यदि इस प्रतिबंध को शिथिल किया जाता है, तो यह दूसरों के लिए हानिकारक होगा।’
न्यायालय 2017 के उन दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिकों और महिला यौनकर्मियों को रक्तदाता बनने से रोकते हैं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयना कोठारी ने कहा कि ये ‘भेदभावपूर्ण’ दिशानिर्देश ट्रांसजेंडर के रक्तदान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने पूछा, ‘हमें एक ठोस कारण बताइए कि हमें ऐसा निर्देश क्यों जारी करना चाहिए?’
पीठ ने कहा कि लाखों गरीब लोग रक्त बैंकों की सुविधा का उपयोग करते हैं, और वे निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते।
पिछले साल मई में इस मामले की सुनवाई करते हुए, शीर्ष अदालत ने केंद्र को उन दिशानिर्देशों में मौजूद पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए विशेषज्ञ राय लेने का निर्देश दिया, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, समलैंगिकों और यौनकर्मियों को रक्तदान करने से रोकते हैं।
भाषा आशीष प्रशांत
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