संविधान संशोधन विधेयक का गिरना भाजपा की नीयत की हार : रेवंत रेड्डी

संविधान संशोधन विधेयक का गिरना भाजपा की नीयत की हार : रेवंत रेड्डी

संविधान संशोधन विधेयक का गिरना भाजपा की नीयत की हार : रेवंत रेड्डी
Modified Date: April 18, 2026 / 05:13 pm IST
Published Date: April 18, 2026 5:13 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक का पारित नहीं होना, सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार नहीं है, बल्कि उसकी नीयत की भी हार है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा की नीयत महिलाओं के खिलाफ है।

रेड्डी ने कहा, ‘‘विपक्षी दलों ने कल लोकसभा में एकजुट होकर नरेन्द्र मोदी जी और भाजपा की नीयत को हरा दिया। अब भाजपा के लोग कह रहे हैं कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ हैं, जबकि हमने ही समर्थन देकर महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया था। मैं नरेन्द्र मोदी जी से कहना चाहता हूं कि आप अपनी नीयत साफ रखिए और सही कानून बनाइए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी ने देश में महिलाओं को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और राज्यपाल समेत तमाम ऊंचे पद पर बैठाया है। राजीव गांधी जी और कांग्रेस पार्टी ने पंचायती राज में देश की महिलाओं को आरक्षण देने का काम किया था, लेकिन आजतक भाजपा ने किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया है।’’

उन्होंने दावा किया कि भाजपा की नीयत ही महिलाओं के खिलाफ है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘भाजपा को संविधान बदलने और आरक्षण हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। इसलिए वह लोकसभा में ये कानून लेकर आए।’’

रेड्डी ने दावा किया, ‘‘अगर गलत तरीके से परिसीमन किया गया, तो कुछ बड़े राज्यों की सीटें मिलाकर ही बहुमत हासिल हो जाएगा। ऐसे में मोदी सरकार संविधान बदल देगी, आरक्षण हटा देगी।’’

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।

सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े।

लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।

सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

भाषा हक हक दिलीप

दिलीप


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