दौसा, करौली के किसानों को दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध होगी: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

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दौसा, करौली के किसानों को दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध होगी: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 01:41 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 01:41 PM IST

जयपुर, 31 मार्च (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि दौसा और करौली जिलों के किसानों को जल्द ही दिन के समय सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इन दोनों जिलों के दो ब्लॉकों में यह सुविधा शुरू होने के बाद राज्य के 24 जिलों में किसानों को दिन में बिजली मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा सोमवार रात अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर की।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिलों में किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। संशोधित बजट 2024-25 में इसे चरणबद्ध तरीके से 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

वर्तमान में 22 जिलों के कृषि उपभोक्ताओं को दो ब्लॉकों में दिन के समय बिजली मिल रही है। दौसा और करौली को जयपुर डिस्कॉम के तहत शामिल करने के बाद यह संख्या बढ़कर 24 हो जाएगी।

फिलहाल जयपुर डिस्कॉम के सात जिलों धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग और भरतपुर में किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली मिल रही है। इसी तरह अजमेर डिस्कॉम के तहत अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, बांसवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर, चित्तौड़गढ़ और डूंगरपुर समेत 12 जिले शामिल हैं। वहीं जोधपुर डिस्कॉम के तहत जालौर, सिरोही और पाली ज़िले भी इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं।

बयान में कहा गया कि हाल के वर्षों में दौसा और करौली में बिजली ढांचे को मजबूत किया गया है। दौसा में 18 नए 33 केवी ग्रिड सबस्टेशन बनाए गए हैं, जबकि करौली में छह सबस्टेशन स्थापित किए गए हैं। दौसा के 47 सबस्टेशनों में ट्रांसफॉर्मर क्षमता 128.95 मेगावोल्ट-एम्पीयर और करौली के 15 सबस्टेशनों में 49.45 मेगावोल्ट-एम्पीयर तक बढ़ाई गई है।

इसके अलावा पीएम-कुसुम योजना के तहत दोनों जिलों में कुल 32 मेगावॉट क्षमता वाले 17 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं।

कुल 87,801 कृषि उपभोक्ता (दौसा में 52,460 और करौली में 35,341) इस दिन की बिजली आपूर्ति से लाभान्वित होंगे।

यह कदम विशेषकर कठिन मौसम में किसानों को देर रात सिंचाई करने की आवश्यकता कम करेगा। साथ ही जंगली जानवरों से होने वाले खतरों से बचाव होगा और किसान अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता सकेंगे।

भाषा बाकोलिया

मनीषा संतोष

संतोष

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