परिसीमन विधेयक के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ना बीजू बाबू को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी : नवीन पटनायक

परिसीमन विधेयक के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ना बीजू बाबू को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी : नवीन पटनायक

परिसीमन विधेयक के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ना बीजू बाबू को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी : नवीन पटनायक
Modified Date: April 17, 2026 / 04:47 pm IST
Published Date: April 17, 2026 4:47 pm IST

भुवनेश्वर, 17 अप्रैल (भाषा) बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा संसद में परिसीमन विधेयक पारित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों से ‘ओडिया स्वाभिमान’ को भारी खतरे का सामना करना पड़ रहा है और इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ना बीजू पटनायक को ‘‘सबसे बड़ी श्रद्धांजलि’’ होगी।

पटनायक ने अपने पिता बीजू पटनायक की 29वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं। वह दिल्ली से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

पटनायक ने कहा, ‘‘बीजू बाबू ओडिया गौरव के प्रतीक थे। आज उनकी पुण्यतिथि पर, ओडिशा के हितों की रक्षा के लिए हमारा एकजुट संघर्ष ही उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।’’

बीजू जनता दल (बीजद) प्रमुख पटनायक प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का कड़ा विरोध कर रहे हैं और उन्होंने आगाह किया कि परिसीमन विधेयक के पारित होने से ओडिशा के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को निचले सदन में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है।

पटनायक ने कहा, ‘‘वर्तमान प्रस्ताव सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करता है। ओडिशा में फिलहाल 21 लोकसभा सीटें हैं (कुल 543 सीटों में से लगभग 3.9 प्रतिशत)। प्रस्तावित विस्तार के तहत कुल सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 850 हो सकती है, जिससे ओडिशा की सीटों की संख्या 29 हो जाएगी, लेकिन आनुपातिक हिस्सेदारी घटकर 3.4 प्रतिशत रह जाएगी, जो लगभग 15 प्रतिशत की सापेक्षिक गिरावट है। यह घोर अन्याय है।’’

पटनायक ने आरोप लगाया कि ओडिशा लगातार केंद्र सरकारों की उपेक्षा का शिकार रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब परिसीमन विधेयक ने ओडिशा की राजनीतिक पहचान पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आज ‘ओडिया स्वाभिमान’ खतरे में है। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर अपने प्रिय ओडिशा के लिए संघर्ष करें।’’

भाषा शफीक अविनाश

अविनाश


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