Amit Shah in Parliament: ‘महिला आरक्षण के साथ होगा 2029 का चुनाव’.. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दी सदन में घोषणा, यहां देखिए उनका लाइव भाषण

संसद में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा जारी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दे रहे जवाब, Amit Shah in Parliament on Women's Reservation Bill

Amit Shah in Parliament: ‘महिला आरक्षण के साथ होगा 2029 का चुनाव’.. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दी सदन में घोषणा, यहां देखिए उनका लाइव भाषण
Modified Date: April 17, 2026 / 06:24 pm IST
Published Date: April 17, 2026 6:09 pm IST

नई दिल्लीः Amit Shah in Parliament: महिला आरक्षण बिल को लेकर बुलाए गए संसद के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन है। लोकसभा में देश के गृहमंत्री अमित शाह जवाब दे रहे हैं। अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने कहा कि सबने बोला है कि हम इसके पक्ष में है। हम स्वागत करते हैं मगर उसको बारिकी से देखें तो इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने अगर, मगर, किंतु, परंतु, का उपयोग करते साफ रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। लेकिन मैं साफ करना चाहता हूं कि ये विरोध केवल महिला आरक्षण का है। इम्पलीमेंटेशन का नहीं है। मैं जब बोलता हूं तब मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं सदन को कन्वींस करूं कि महिला आरक्षण का विरोध है। तरीकों का विरोध नहीं है। इन 3 बिलों में इसका मकसद मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। अमित शाह ने सदन में यह घोषणा की है कि आने वाला 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ होगा।

शाह बोले- हर सीट पर वोटर्स की संख्या अलग-अलग

Amit Shah in Parliament: शाह ने कहा- इन 3 बिलों में इसका मकसद मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। पहला- महिला सशक्तिकरण करने वाले इस संविधान सुधार को लागू करके 2029 का चुनाव इसके आधार पर हो। ये पूरे सदन में 543 सदस्य हैं। किसी की सीट में वोटर्स की संख्या 49 लाख है किसी की 60 हजार है। कई ऐसे हैं जो 70 के दशक में फ्रीज हो गई हैं जहां सांसद वोटर्स को मुंह भी नहीं दिखा सकते। क्योंकि क्षेत्र इतना बडा हो गया है। क्या इस सदन में जो विरोध करते हैं, मुझे समझा सकते हैं कि जिस सांसद के क्षेत्र में 49 लाख वोटर्स हो वो कैसे जिम्मेदारी निभाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए संविधान में समय समय पर परिसीमन का प्रावधान है।

परिसीमन की जिम्मेदारी मोदी सरकार की है

Amit Shah in Parliament: शाह ने कहा- परिसीमन के चलते जिस वर्ग यानी एससी और एसटी, जिसकी संख्या बढ़ती है , सीटें भी बढ़ती है। संतुलित समावेशी और व्यवहारिक लोकतांत्रिक ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सरकार की है। अभी ये जिम्मेदारी मोदी सरकार की है। ये देश की जनता तय करती है। ये वंश, परंपरागत नहीं होती। शाह ने कहा कि नए भूगोल, प्रशासनिक, और शहरीकरण, रोड, रास्ते और रेल केनक्टिवीटी के अलावा नए जिले का संज्ञान परिसीमन में लेना होता है। क्योंकि सांसद की ड्यूटी की निर्वहन के लिए ये सब जरूरी होता है। कई सदस्यों ने अनेक आशंकाए व्यक्त कीं। कहा कि अभी क्यों लाए। मैं बताना चाहता हूं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियिम में जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणनाके बाद जो चुनाव होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण होगा।

 

 

 


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