नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) अकाल तख्त ने इस बात पर खेद व्यक्त किया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विवादित वीडियो मामले में गुरुग्राम पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज किये जाने की खबर को, विशेष रूप से पंजाबी और क्षेत्रीय मीडिया ने ‘‘पर्याप्त कवरेज नहीं दी’’।
अकाल तख्त ने इस महीने की शुरुआत में एक वीडियो को लेकर मान को ‘‘गुरु दोखी’’ (गुरु-द्रोही) और ‘‘खालसा पंथ विरोधी’’ घोषित किया था। वीडियो में कथित तौर पर मान जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति सिख गुरुओं और मारे गए आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में लिप्त दिखाई दे रहा है।
चंडीगढ़, जालंधर, अमृतसर के प्रेस क्लबों और पत्रकार संगठनों को लिखे एक पत्र में अकाल तख्त ने कहा कि सिख मुद्दों पर उसके निर्णय, कार्य और प्रतिक्रियाएं उसके सचिवालय द्वारा मीडिया के साथ आधिकारिक रूप से साझा की जाती हैं।
इसमें कहा गया है कि इसी तरह, मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के वीडियो से जुड़े मामले पर एक आधिकारिक बयान जारी किया गया था।
पत्र में कहा गया है, ‘‘मीडिया के एक बड़े हिस्से ने इस गंभीर मामले पर अकाल तख्त साहिब के सचिवालय का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित नहीं किया है, जो कि खेदजनक है।’’
हरियाणा पुलिस ने एक व्यक्ति की शिकायत पर मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज करके दो लोगों को गिरफ्तार किया था। शिकायत में व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित विवाद से जुड़े वायरल वीडियो की फर्जी फोरेंसिक रिपोर्ट की व्यवस्था कराने के लिए उससे संपर्क किया गया था।
अकाल तख्त ने अपने पत्र में कहा, ‘‘मीडिया संस्थानों, विशेष रूप से पंजाबी मीडिया और डिजिटल मीडिया ने इस घटना की कवरेज नहीं की।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘दुर्भाग्यवश, मीडिया के एक बड़े हिस्से ने इस गंभीर मामले पर अकाल तख्त साहिब के सचिवालय का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित नहीं किया है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘लोकतंत्र में मीडिया चौथे स्तंभ की भूमिका निभाता है, और इसलिए यदि मीडिया किसी भी दबाव के तहत जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं और समाचारों को प्रकाशित नहीं करता, तो वह अपने दायित्व का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहा है।’’
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देवेंद्र प्रशांत
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