हरियाणा के किसानों को टिकाऊ खेती के बारे में विशेषज्ञों से सलाह मिली

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हरियाणा के किसानों को टिकाऊ खेती के बारे में विशेषज्ञों से सलाह मिली

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 09:15 PM IST

चंडीगढ़, 24 जून (भाषा) रेवाड़ी ज़िले में एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कई किसानों ने टिकाऊ खेती के तरीकों और मिट्टी की सेहत के प्रबंधन के बारे में जानकारी हासिल की।

यह कार्यक्रम ‘खेत बचाओ अभियान 2026’ के तहत बुधवार को एसजीटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रेवाड़ी और इफको हरियाणा के साथ मिलकर खलियावास और खतवाली गांवों में आयोजित किया था।

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम का मकसद किसानों को संतुलित खाद के इस्तेमाल, मिट्टी के संरक्षण, जैविक खेती और किसान समुदाय के लिए सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना था।

विशेषज्ञों ने किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के बारे में बताया, जो मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने और फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए जैविक और रासायनिक खादों के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देता है।

उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्वों के प्रबंधन, मिट्टी में कार्बन के संरक्षण और लंबे समय तक मिट्टी की सेहत बनाए रखने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।

किसानों को पर्यावरण के अनुकूल और कम खर्चीले तरीकों, जैसे कि वर्मीकम्पोस्टिंग, जैव-उर्वरक और फसल विविधीकरण (अलग-अलग तरह की फसलें उगाना) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि फलों, विदेशी सब्ज़ियों और फूलों की खेती से पर्यावरण पर बुरा असर कम करते हुए खेती से होने वाली कमाई बढ़ाई जा सकती है।

कार्यक्रम को कृषि विज्ञान संकाय की डीन पूजा पंत, आर के यादव, ओम प्रकाश और नरेंद्र भंडारी के साथ-साथ केवीके रेवाड़ी और इफको हरियाणा के विशेषज्ञों ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने किसानों से रासायनिक खाद पर बहुत ज़्यादा निर्भरता कम करने और टिकाऊ खेती के तरीके अपनाने का आग्रह किया, जिनसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाते हुए पैदावार बढ़ाई जा सके।

पंत ने किसानों को एसजीटी विश्वविद्यालय की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के बारे में बताया, जो मिट्टी की जांच और सलाह देने की सेवाएं देती है ताकि किसान पोषक तत्वों का सही तरीके से प्रबंधन कर सकें और फसल की पैदावार बढ़ा सकें।

उन्होंने मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से मिट्टी की जांच करवाने के महत्व पर ज़ोर दिया।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय