उड़ान अव्यवस्था : उच्च न्यायालय ने इंडिगो को हलफनामा दाखिल करने को कहा
उड़ान अव्यवस्था : उच्च न्यायालय ने इंडिगो को हलफनामा दाखिल करने को कहा
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंडिगो को पिछले साल दिसंबर में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के कारण प्रभावित यात्रियों को रद्द टिकटों के लिए धन वापसी और मुआवजे के भुगतान के संबंध में बृहस्पतिवार को एक हलफनामा दाखिल करने को कहा।
कम लागत वाली एयरलाइन के वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ को बताया कि रद्द की गई उड़ानों के लिए धन वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार उड़ानें रद्द होने पर मुआवजे की भी पेशकश की जा रही है।
वकील ने यह भी कहा कि ‘सबसे बुरी तरह प्रभावित’ उड़ानों के लिए 10,000 रुपये के वाउचर की पेशकश की जा रही है और यात्रियों के लिए मुआवजे का दावा करने के लिए एक वेबसाइट स्थापित की गई है।
पीठ ने कहा, ‘प्रतिवादी संख्या तीन द्वारा इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल किया जाए।’
अदालत वकीलों अखिल राणा और उत्कर्ष शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को केंद्र सरकार से सहायता और धन वापस दिलाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार, तीन से पांच दिसंबर 2025 के बीच 2,507 उड़ानें रद्द की गईं और 1,852 उड़ानों में देरी हुईं, जिससे देश भर के हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इंडिगो प्रभावित यात्रियों को 10,000 रुपये का यात्रा वाउचर दे रही है, जिसकी वैधता कुछ समय बाद समाप्त हो जाएगी।
यह जानकारी मिलने पर कि वाउचर की वैधता 12 महीने है, पीठ ने इंडिगो के वकील से यह स्पष्ट करने को कहा कि यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के भीतर वाउचर का उपयोग नहीं कर पाता है तो उसका क्या होगा।
वकील ने कहा कि वे निर्देश लेंगे। पीठ ने कहा, ‘कृपया हलफनामा दाखिल करें।’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए की ओर से पेश हुए और उन्होंने बताया कि संकट के बाद अधिकारियों द्वारा कई कदम उठाए गए थे।
उन्होंने बताया कि एयरलाइन के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया गया और कंपनी पर 22 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
इसके अलावा, बेहतर अनुपालन के लिए 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी मांगी गई और एयरलाइन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों, जैसे सीईओ और सीओओ को चेतावनी दी गई।
व्यवधान की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट भी सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश की गई।
मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।
भाषा नोमान नरेश
नरेश


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