वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाया जाना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा : तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद
वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाया जाना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा : तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद
नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक असहमति को दबाने और शिक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी करने का रविवार को आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाया जाना एक “बड़ा राजनीतिक मुद्दा” बनेगा।
अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए आजाद ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अपना रुख बदल लिया है।
उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, “यह यकीनन एक बड़ा मुद्दा बनेगा, क्योंकि जब अन्ना हजारे विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि लोगों को प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दी जा रही है, लेकिन आज वह चुप हैं।”
आजाद ने प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक विदेश में रहते हैं। उन्होंने भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) पर प्रभावी शासन सुनिश्चित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
आजाद ने दावा किया कि केंद्र सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की ज्यादा चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि हजारों सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और इस मुद्दे को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर विवाद से भी जोड़ा।
आजाद ने कहा, “जब हजारों सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं और अब तक एक लाख से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं, तो यह दिखाता है कि उन्हें (केंद्र सरकार) नीट जैसे मुद्दों की कोई चिंता नहीं है।”
तृणमूल कांग्रेस उन राजनीतिक दलों में शामिल है, जिन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आंदोलन को शुरुआती चरण से ही समर्थन दिया है। पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक और प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता दिखाई, जबकि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे (वांगचुक) फोन पर बात की।
तृणमूल कांग्रेस ने घोषणा की है कि उसके सांसद सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन संसद की ओर कॉजपा के प्रस्तावित मार्च में शामिल होंगे और संगठन की मांगों का समर्थन करेंगे।
भाषा पारुल प्रशांत
प्रशांत

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