आरकॉम के पूर्व अधिकारी गौतम दोशी को धन शोधन मामले में पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया

आरकॉम के पूर्व अधिकारी गौतम दोशी को धन शोधन मामले में पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया

आरकॉम के पूर्व अधिकारी गौतम दोशी को धन शोधन मामले में पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेजा गया
Modified Date: June 13, 2026 / 07:29 pm IST
Published Date: June 13, 2026 7:29 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के पूर्व वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी गौतम भाईलाल दोशी को 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण निधि के कथित दुरुपयोग (डायवर्जन) से जुड़े धन शोधन मामले में पांच दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया।

विशेष न्यायाधीश गौरव राव ने दोशी की 14 दिन की हिरासत की मांग करने वाली एजेंसी की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

दोशी को सुबह करीब 8:15 बजे न्यायाधीश के आवास पर पेश किया गया। इसके पहले दोशी को गिरफ्तार करके ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई से दिल्ली लाया गया था।

अपने आदेश में अदालत ने कहा, ‘‘ईडी की दलीलों, आरोपों की प्रकृति और पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के मकसद के साथ-साथ फंड के पूरे लेन-देन, उसकी वसूली और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने के लिए, मैं आरोपी को पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में देना उचित समझता हूं।’’

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत दोशी से पूछताछ के लिए 14 दिनों की हिरासत में लेने का अनुरोध किया था। ईडी ने यह दलील दी कि ऋण निधि के कथित दुरुपयोग और हेराफेरी के पीछे की ‘पूरी साजिश’ का पर्दाफाश करने के लिए उसकी हिरासत आवश्यक है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोशी को 18 जून तक ईडी की हिरासत में भेज दिया।

ईडी के अनुसार, जांच में रिलायंस एडीए समूह की संस्थाओं से लिए गए ऋणों की धनराशि को विदेशी कंपनियों और विदेशी बैंक खातों में स्थानांतरित करने से संबंधित लेन-देन का पता चला है।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि बैंकों से लिए गए ऋणों का उपयोग उनके निर्धारित उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, बल्कि उन्हें म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया और समूह की कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया गया।

ईडी ने अदालत को बताया कि दोशी रिलायंस एडीए समूह में ‘काफी प्रभाव और नियंत्रण रखने’ वाले पद पर था और इसके वित्तीय, कॉर्पोरेट और अपतटीय संचालन से घनिष्ठ रूप से जुड़ा था।

ईडी ने आरोप लगाया कि दोशी रिलायंस एडीए समूह के समूह प्रबंध निदेशकों में से एक थे, वह संबंधित अवधि के दौरान रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड का निदेशक और इसकी लेखापरीक्षा समिति का सदस्य रहे।

जांच एजेंसी ने दावा किया कि वित्तीय संचालन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी नियमित रूप से दोशी को भेजी जाती थी और कामकाज उनके पर्यवेक्षण में होता था।

अदालत ने कहा, ‘‘अब तक की जांच में आरएएजी से लिए गए ऋण की धनराशि को विदेशी अंशदान, विदेशी बैंकों और अपतटीय कंपनियों में स्थानांतरित करने का पता चला है। कुछ बैंकों से प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया।’’

दोशी को हिरासत में देने का अनुरोध करते हुए ईडी ने कहा कि कथित अपराध से अर्जित आय के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने और घरेलू एवं विदेशी संपत्तियों का पता लगाने के लिए जब्त किए गए ईमेल, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और गवाहों के बयानों के आधार पर उनसे पूछताछ करना आवश्यक है।

बचाव पक्ष ने हिरासत में लेने के ईडी के अनुरोध का विरोध करते हुए तर्क दिया कि दोशी की गिरफ्तारी या उन्हें हिरासत में भेजने का कोई उचित आधार नहीं है।

बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकील ने बताया कि दोशी ने पूरी जांच में सहयोग किया और इस साल 27 जनवरी को पीएमएलए की धारा 50 के तहत अपना बयान दर्ज कराने के बाद एजेंसी के सामने पेश हुए थे।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप


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