हरियाणा में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए चार ‘गौ वन’ विकसित किए जा रहे

हरियाणा में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए चार ‘गौ वन’ विकसित किए जा रहे

हरियाणा में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए चार ‘गौ वन’ विकसित किए जा रहे
Modified Date: September 22, 2026 / 01:24 pm IST
Published Date: September 22, 2026 1:24 pm IST

चंडीगढ़, 22 सितंबर (भाषा) हरियाणा के गांवों और शहरों में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए चार ‘गौ वन’ विकसित करने समेत कई कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य लोक उद्यम ब्यूरो के अध्यक्ष मोहन लाल कौशिक ने यह जानकारी दी।

कौशिक ने सोमवार को यहां हरियाणा गौ सेवा आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ग्राम पंचायतों को गौशालाओं को कम से कम 10 एकड़ ‘गोचर’ भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, ताकि गायों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि फिलहाल राज्यभर में करीब 70,000 गाय सड़कों पर घूम रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गौशालाओं और ‘गौ वन’ में आश्रय देने के लिए गौ सेवा आयोग, ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों का सहयोग लिया जा रहा है।

महेंद्रगढ़ के भोजावास गांव में 89 एकड़ में फैले ‘गौ वन’ को विकसित करने का काम अंतिम चरण में है, जबकि पलवल के राजपुरा खादर, कैथल के भूना और करनाल के सांभली में ‘गौ वन’ विकसित करने की प्रक्रिया जारी है।

कौशिक ने बताया कि राज्य में करीब 707 पंजीकृत गौशालाओं में फिलहाल लगभग 40,000 गाय रखी गई हैं। बाकी मवेशियों को अतिरिक्त गौशालाओं में स्थानांतरित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

इस महीने 22 गौशालाओं को चालू किया जाएगा, जबकि 14 नयी गौशालाएं खोलने की प्रक्रिया भी जारी है।

कौशिक ने कहा कि गौशालाओं और ‘गौ वन’ को विकसित करना, मवेशियों के लिए सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना तथा उनके लिए चारे और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्यभर की पंजीकृत गौशालाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जाएंगे। इन ‘गौ सेवा रथों’ का इस्तेमाल घायल और बीमार गायों को सहायता पहुंचाने के लिए किया जाएगा।

सरकार चारा अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता भी प्रदान कर रही है। अनुदान के लिए पोर्टल खुला है और पंजीकृत गौशालाएं 14 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं।

भाषा तान्या सिम्मी

सिम्मी


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