ओडिशा में जल्द ही चार और डॉपलर रडार स्थापित किए जाएंगे : मंत्री

ओडिशा में जल्द ही चार और डॉपलर रडार स्थापित किए जाएंगे : मंत्री

ओडिशा में जल्द ही चार और डॉपलर रडार स्थापित किए जाएंगे : मंत्री
Modified Date: July 3, 2026 / 11:51 am IST
Published Date: July 3, 2026 11:51 am IST

भुवनेश्वर, तीन जुलाई (भाषा) ओडिशा सरकार ने राज्य में जल्द ही चार और डॉपलर रडार स्थापित करने का निर्णय लिया है। एक मंत्री ने यह जानकारी दी।

मंत्री ने कहा कि डॉपलर रडार की मदद से चक्रवात, बाढ़ और वर्षा जैसी प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान अधिक सटीक तरीके से लगाया जा सकेगा।

यह निर्णय बृहस्पतिवार को ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया।

पुजारी ने बताया कि नए डॉपलर रडार जल्द ही भुवनेश्वर, संबलपुर, पुरी और पारादीप में स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में राज्य में पारादीप और गोपालपुर में दो सक्रिय डॉपलर रडार कार्यरत हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘संबलपुर में डॉपलर मौसम रडार की स्थापना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और इसका जल्द ही उद्घाटन किया जाएगा।’’ उन्होंने बताया कि इसी तरह अन्य तीन स्थानों पर भी इस वर्ष के भीतर यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी।

डॉपलर रडार एक वैज्ञानिक उपकरण है, जो परावर्तित रेडियो तरंगों की आवृत्ति में होने वाले परिवर्तन का पता लगाता है। इसकी सहायता से मौसम वैज्ञानिक हवा की गति का मानचित्रण, तूफानों की निगरानी तथा चक्रवात और भारी वर्षा जैसी गंभीर मौसम संबंधी घटनाओं का पूर्वानुमान लगा सकते हैं।

मंत्री ने सभी संबंधित विभागों को राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (एसडीएमएफ) और राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष (एनडीएमएफ) के तहत संचालित परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने तथा निर्धारित समय-सीमा से पहले उन्हें पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि लू से निपटने के लिए प्रस्तावित केंद्रों का निर्माण संवेदनशील जिलों में अगले ग्रीष्मकाल की शुरुआत से पहले पूरा कर उन्हें संचालित किया जाए।

बैठक में अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्य की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह निर्णय लिया गया कि जल संसाधन विभाग के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा जाएगा, ताकि सिंचाई के लिए जलाशयों, सिंचाई परियोजनाओं और जल भंडारण सुविधाओं का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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