(कुणाल दत्त)
नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में बने ऐतिहासिक शास्त्री भवन को जल्द ही ध्वस्त किए जाने की तैयारी के बीच, इसके बाहरी हिस्से में प्रख्यात कलाकार सतीश गुजराल द्वारा 1968 में बनाए गए दो विशाल भित्तिचित्रों (म्यूरल) को नया जीवन मिल सकता है क्योंकि राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए) के नेतृत्व वाली विशेषज्ञों की एक टीम की योजना इन बहुमूल्य कलाकृतियों को ‘‘सावधानीपूर्वक हटाने और लुटियंस दिल्ली में ही किसी अन्य स्थान पर स्थापित करने’’ की है।
दिल्ली स्थित एनजीएमए के नेतृत्व वाली इस टीम में संग्रहालय के कलाकार, कला एवं वास्तुकला संरक्षण विशेषज्ञों के साथ-साथ गुजराल फाउंडेशन के माध्यम से प्रख्यात कलाकार के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
एनजीएमए के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सतीश गुजराल हमारे देश के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में से एक थे और पिछले साल हमने एनजीएमए में उनकी जन्मशती मनाई थी। भवन को ध्वस्त किया जाना है, इसलिए हमें शास्त्री भवन के उनके प्रतिष्ठित भित्तिचित्रों को सावधानीपूर्वक हटाने और स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।’’
उन्होंने कहा कि भित्तिचित्रों को स्थानांतरित करने के लिए उपयुक्त जगह तलाशने का काम शुरू हो गया है, लेकिन ‘‘हम इसे लुटियंस दिल्ली के भीतर ही रखना चाहते हैं।’’
एनजीएमए की ओर से इस ‘‘चुनौतीपूर्ण परियोजना’’ के प्रमुख सदस्य ने कहा, ‘‘हमने संभावित स्थानों का सुझाव देने के लिए नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग से संपर्क किया है।’’
टीम ने हाल में आईटीओ के पास स्थित ‘स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर’ (एसपीए) परिसर को संभावित स्थान के रूप में चुना था, लेकिन बाद में समझ आया कि विशाल आकार वाले इन भित्तिचित्रों को लगाने के लिए इससे कहीं अधिक ऊंची इमारत की जरूरत होगी। इसलिए नए स्थान की तलाश अभी जारी है।
स्वतंत्रता के बाद शुरुआती दशकों में दिल्ली के मध्य में कई मंत्रालयों के कार्यालयों के लिए इसका निर्माण किया गया था।
इसका नाम भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा गया था। यह ‘जी+7’ संरचना है और राजेंद्र प्रसाद रोड की ओर बने गेट नंबर दो और गेट नंबर तीन के ऊपर लगे दोनों भित्तिचित्र पहली से सातवीं मंजिल तक लंबवत रूप से फैले हुए हैं।
एनजीएमए की क्यूरेटर ज्योति टोकस ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने ड्रोन की मदद से प्रत्येक स्तर की तस्वीरें लेकर दस्तावेजीकरण किया है। वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण जारी है। प्रत्येक भित्तिचित्र लगभग 73 फुट ऊंचा और आधार पर 11 फुट चौड़ा है।’’
टोकस ने बताया कि एक भित्तिचित्र के ऊपरी हिस्से में एक पुरुष आकृति है, जिसके ऊपर अर्ध-पौराणिक पक्षी बना है। इसमें एक चक्र भी है और उसके नीचे कलाकार के हस्ताक्षर ‘गुजराल 68’ (सिरेमिक में और हिंदी में नाम) हैं।
दूसरे भित्तिचित्र में एक महिला आकृति है, जो हाथ से अपना चेहरा ढकती हुई दिखाई गई है। इसके नीचे एक चक्र, फिर पौराणिक घोड़े जैसे जीव और एक मोजेक है, जिसमें पहला हिंदी अक्षर ‘क’ और कुछ हिंदी अंक बनाए गए हैं। इसके नीचे एक और चक्र तथा सबसे नीचे पीठ पर पक्षी लिए घोड़े जैसे जीव की आकृति है।
उन्होंने कहा कि दोनों पैनलों के विशाल आकार को देखते हुए दिल्ली के मध्य में इतनी बड़ी दीवार वाला स्थान तलाशना एक तार्किक चुनौती है। साथ ही यह शोध की दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण है
अधिकारियों ने बताया कि इन चुनौतियों को देखते हुए एनजीएमए कला और संरचनात्मक संरक्षण से जुड़े काम का अनुभव रखने वाली दिल्ली की एक कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहा है। कंपनी के सदस्यों ने हाल में शास्त्री भवन का दौरा किया था।
गुजराल दिल्ली में बेल्जियम दूतावास भवन के डिजाइन के लिए भी जाने जाते हैं। कला क्षेत्र की दिग्गज हस्ती गौतम ने कहा, ‘‘उनके भित्तिचित्र वास्तु संबंधी कल्पना शक्ति से संपन्न कलाकार के रूप में किए गए कार्यों को दर्शाते हैं।
टोकस ने कहा कि गुजराल परिवार इन भित्तिचित्रों को लेकर ‘‘बहुत भावुक’’ है और इस पहल में सहयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे मोहित गुजराल वास्तुकार हैं और इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
लुटियंस दिल्ली की पहचान माने जाने वाले शास्त्री भवन और पास स्थित कृषि भवन को जल्द ही ध्वस्त किया जाना है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने दोनों परिसरों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बन रहे नए सरकारी कार्यालय परिसर में कर्तव्य भवन चार और पांच इन दोनों इमारतों की जगह लेंगे। ये भवन 1956 से 1968 के बीच बनाए गए थे और दशकों तक केंद्रीय मंत्रालयों के प्रशासनिक केंद्र रहे।
देश के प्रधानमंत्री रहे इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई सतीश गुजराल का 26 मार्च 2020 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।
भाषा शोभना रंजन संतोष
संतोष