न्याय मिलने में भौगोलिक दूरी बाधा नहीं बननी चाहिए: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
न्याय मिलने में भौगोलिक दूरी बाधा नहीं बननी चाहिए: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
लेह, 29 मार्च (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि न्याय तक पहुंच भौगोलिक सीमाओं से परे होनी चाहिए और भौगोलिक दूरी न्याय प्रदान करने में बाधा नहीं बननी चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के न्यायिक ढांचे में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में करगिल में नवनिर्मित जिला न्यायालय परिसर का वर्चुअल उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।
इस समारोह में लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और उच्च न्यायालय के कई न्यायमूर्ति उपस्थित थे।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘भौगोलिक बाधाएं न्याय प्रदान करने में रुकावट नहीं बननी चाहिए’ और इस अवसर को दूरस्थ क्षेत्रों में न्याय तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि करगिल दृढ़ता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि नया परिसर केवल बुनियादी ढांचे में वृद्धि ही नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली में गुणात्मक सुधार का भी प्रतीक है, जिससे याचिकाकर्ताओं में नया विश्वास पैदा हुआ है।
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि कार्यवाही राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के साथ शुरू हुई, जिसके बाद स्मारक पट्टिका का अनावरण किया गया।
न्यायमूर्ति पल्ली ने क्षेत्र में न्यायिक अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए निरंतर समर्थन मिलने की आशा व्यक्त की।
उपराज्यपाल सक्सेना ने उद्घाटन समारोह को सुगम बनाने के लिए प्रधान न्यायाधीश के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है।
करगिल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रियाज अहमद खान ने प्रधान न्यायाधीश और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
भाषा
राखी संतोष
संतोष

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