वैश्विक तापमान 2015 के बाद से तेजी से बढ़ा : अध्ययन

वैश्विक तापमान 2015 के बाद से तेजी से बढ़ा : अध्ययन

वैश्विक तापमान 2015 के बाद से तेजी से बढ़ा : अध्ययन
Modified Date: March 9, 2026 / 07:30 pm IST
Published Date: March 9, 2026 7:30 pm IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) एक अध्ययन में दावा किया गया है कि 2015 के बाद वैश्विक तापमान में तेजी से वृद्धि हुई। यह अध्ययन अल नीनो घटनाएं, ज्वालामुखी विस्फोट और सौर चक्र में बदलाव के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए किया गया।

जर्मनी के ‘पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च’ के शोधकर्ताओं सहित वैज्ञानिकों ने बताया कि वैश्विक तापमान में प्राकृतिक रूप से अल्पकालिक उतार-चढ़ाव, जैसे अल नीनो, ज्वालामुखी विस्फोट और सौर गतिविधियों में बदलाव दीर्घकालिक तापमान वृद्धि की वास्तविक गति को सामने आने से रोक सकते हैं।

यह अध्ययन पत्रिका ‘जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स’ में प्रकाशित हुआ है। इसमें पांच वैश्विक तापमान डेटासेट का विश्लेषण किया गया, जिनमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और ‘नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ द्वारा संचालित डेटासेट भी शामिल हैं।

अध्ययन के सह-लेखक और अमेरिकी सांख्यिकी विशेषज्ञ ग्रैंट फोस्टर ने कहा कि अवलोकन संबंधी आंकड़ों से ज्ञात प्राकृतिक प्रभावों को अलग रखने पर दीर्घकालिक तापमान वृद्धि का वास्तविक संकेत स्पष्ट दिखाई देता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तरह समायोजित और कम उतार-चढ़ाव वाले आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक तापमान वृद्धि की गति तेज हुई है और पिछले 10 वर्षों में तापमान वृद्धि किसी भी पिछले दशक की तुलना में अधिक रही है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि वर्ष 2023 और 2024, जो असाधारण रूप से गर्म रहे, समायोजन के बाद थोड़े कम गर्म साल प्रतीत होते हैं, लेकिन फिर भी वे आधुनिक उपकरण आधारित रिकॉर्ड की शुरुआत होने से अब तक के दो सबसे गर्म वर्ष हैं।

वैज्ञानिकों ने कहा कि तापमान वृद्धि की यह तेज रफ्तार चिंताजनक है और संकेत देती है कि वैश्विक तापमान को कम करने और अंततः रोकने के लिए पेरिस समझौता के तहत किए जा रहे प्रयास अभी पर्याप्त नहीं हैं।

अध्ययन के मुख्य लेखक स्टीफन रैम्सटोर्फ ने कहा कि यदि पिछले दस वर्षों की तरह ही तापमान बढ़ता रहा, तो दुनिया 2030 से पहले ही पेरिस समझौते द्वारा निर्धारित 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकती है।

उन्होंने कहा कि पृथ्वी कितनी तेजी से गर्म होती है, यह अंततः इस बात पर निर्भर करेगा कि दुनिया जीवाश्म ईंधनों से होने वाले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कितनी जल्दी शून्य तक ला पाती है।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


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