गोवा: सरकार ने शहरी क्षेत्र विवाद पर अंतिम निर्णय से पहले पंचायतों से परामर्श का वादा किया

गोवा: सरकार ने शहरी क्षेत्र विवाद पर अंतिम निर्णय से पहले पंचायतों से परामर्श का वादा किया

गोवा: सरकार ने शहरी क्षेत्र विवाद पर अंतिम निर्णय से पहले पंचायतों से परामर्श का वादा किया
Modified Date: June 26, 2026 / 04:53 pm IST
Published Date: June 26, 2026 4:53 pm IST

पणजी, 26 जून (भाषा) गोवा सरकार ने गांवों पर शहरी क्षेत्र का दर्जा थोपे जाने की आशंकाओं के बीच शुक्रवार को आश्वासन दिया कि किसी गांव को ‘शहरी क्षेत्र’ घोषित करने का निर्णय संबंधित पंचायत से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।

राजस्व मंत्री अतानासियो मोनसेराटे ने कहा कि सरकार सभी पक्षों से विधिवत चर्चा और परामर्श के बाद ही उचित निर्णय लेगी। इससे पहले दिन में कांग्रेस, गोवा फॉरवर्ड पार्टी और आम आदमी पार्टी (आप) ने ब्लॉक विकास अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायतों को जारी हालिया परिपत्र पर चिंता जताई थी।

परिपत्र में कहा गया था कि राजस्व विभाग ‘वर्ष 2020 में जारी उस अधिसूचना की पुनर्समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत गोवा के 56 गांवों को शहरी क्षेत्र घोषित किया गया था’।

कांग्रेस के प्रवक्ता अमित पालेकर ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गोवा की जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव कर राज्य को ‘बेचने’ का काम कर रही है।

उन्होंने कहा, “पहले से ही बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव है, प्राकृतिक संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है और गांवों की पहचान तथा पर्यावरण का धीरे-धीरे क्षरण हो रहा है। भाजपा, मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत और राजस्व विभाग द्वारा हमारी जमीनों की अंततः बिक्री के उद्देश्य से उठाए जा रहे ऐसे किसी भी कदम का हम कड़ा विरोध करते हैं।”

गोवा फॉरवर्ड पार्टी के प्रमुख विजई सरदेसाई ने कहा कि गोवा के लोग विकास के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम ऐसे विकास के खिलाफ हैं, जिसे आंकड़ों, चर्चा और लोगों की सहमति के बिना उन पर थोपा जाए।”

सरदेसाई ने कहा कि साल्सेते के 10 गांवों पर शहरी क्षेत्र का दर्जा थोपने की यह ‘अवैज्ञानिक पहल’ विकास से जुड़ा मामला नहीं बल्कि यह ग्राम सभाओं की भूमिका को दरकिनार करता है और स्थानीय पंचायतों को कमजोर करता है।

आम आदमी पार्टी विधायक क्रूज सिल्वा ने कहा कि पारिस्थितिक दृष्टि से संवेदनशील गांवों को शहरी क्षेत्र घोषित करने का कदम पर्यावरण और स्थानीय पहचान को नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार बड़े-बड़े रियल एस्टेट परियोजनाएं लेकर आएगी, जिससे पर्यावरण को क्षति पहुंचेगी।

राजस्व मंत्री अतानासियो मोनसेराटे ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सरकार ने वर्ष 2020 में कुछ गांवों को शहरी क्षेत्र घोषित किया था, लेकिन बाद में उस अधिसूचना को वापस ले लिया गया था।

उन्होंने बताया कि हाल ही में तालेगांव ग्राम पंचायत ने सरकार को एक ज्ञापन भेजकर कहा था कि वह जनगणना नगर (सेंसस टाउन) के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करती है। मंत्री ने कहा, “इस प्रतिवेदन को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच की गई और उस क्षेत्र को शहरी क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया।”

मोनसेराटे ने कहा कि प्रत्येक पंचायत के विचारों पर गौर करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

भाषा जितेंद्र अमित

अमित


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