सरकार ने देश के ‘नीति निर्माण मंच’ को अपना ‘विज्ञापन पोर्टल’ बना दिया है : सयानी घोष
सरकार ने देश के ‘नीति निर्माण मंच’ को अपना ‘विज्ञापन पोर्टल’ बना दिया है : सयानी घोष
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की सांसद सयानी घोष ने सत्तारूढ़ भाजपा पर बुधवार को लोकसभा में आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने देश के ‘नीति निर्माण मंच’ को अपना ‘विज्ञापन पोर्टल’ बना दिया है और वे लोकसभा अध्यक्ष के पद का इस्तेमाल विपक्ष और सदन को खामोश करने के लिए कर रहे हैं।
लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए गए संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए घोष ने कहा कि वह स्पष्ट करना चाहती हैं कि ‘‘व्यक्तिगत तौर पर बिरला जी के प्रति उनका कोई आक्रोश या विरोध नहीं है’’ लेकिन लोकसभा अध्यक्ष के पद से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, जो इसके कामकाज का अभिन्न हिस्सा है।
तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले सात साल से लोकसभा उपाध्यक्ष का पद खाली रखा गया है क्योंकि वे नहीं चाहते कि इस तरफ (विपक्ष) का कोई सदस्य उस पर पर आसीन हो।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सरकार ने देश के पॉलिसी मेकिंग प्लेटफॉर्म को अपना विज्ञापन पोर्टल बना दिया है’’ और वे आसन का इस्तेमाल विपक्ष और इस सदन को चुप करने के लिए कर रहे हैं ताकि अपना एजेंडा चला सकें।
उन्होंने कहा कि संसद चलाने में हर मिनट ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं 2014 के 2024 के शीतकालीन सत्र तक कुल 3,300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ क्योंकि सरकार नहीं चाहती थी कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो।
घोष ने कहा कि संसद में पेश किये गए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट की संख्या 2015 के 53 से घटकर 2023 में महज 18 रह गई।
उन्होंने विपक्ष के आठ सदस्यों के निलंबन का हवाला देते हुए कहा, ‘‘बाहर विरोध करते हैं तो एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज होगी, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और सीबीआई की कार्रवाई होगी और सदन के अंदर विरोध-प्रदर्शन करने पर निलंबित कर दिये जाते हैं।’’
तृणमूल सांसद ने कहा, ‘‘बाहर भी बुलडोजर चलाएंगे और सदन के अंदर भी बुलडोजर चलाएंगे, ऐसा नहीं हो सकता…।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सदन में हम अपने नेता का नाम एक से ज्यादा बार बोलें तो हम पर रोक लगाई जाती है, जबकि सत्तापक्ष के लोग पार्टी का नारा लगाते हैं और अपने नेता व मंत्रियों का नाम जपते हैं…।’’
उन्होंने सत्तापक्ष के किसी सदस्य का नाम लिए बिना कहा, ‘‘हमारी बात जब खलने लगे तो माइक अपने आप बंद हो जाती है। पत्रिका दिखाना, किताबों से उद्धृत करने की राहुल (गांधी) जी अखिलेश (यादव) जी, अभिषेक (बनर्जी) जी को अनुमति नहीं है, लेकिन चहेते सदस्यों को अनुमति दी जाती है।’’
घोष ने कहा, ‘‘हम मानते हैं कि नेता प्रतिपक्ष का सलाहकार कोई नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री का सलाहकार बनकर यह कहते हुए उन्हें सदन में आने से रोक दिया गया कि महिला सांसदों से उन्हें खतरा है। आपने तो हमें देशवासियों के सामने आतंकवादी बना दिया, जबकि असली आतंकवादी इस देश में साइकिल से आते हैं और पैदल वापस चले जाते हैं। आप उनको रोक नहीं पाते।’’
भाषा सुभाष हक
हक

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