सरकार ने लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए एएमसीए परियोजना में चयन प्रक्रिया शुरू की

सरकार ने लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए एएमसीए परियोजना में चयन प्रक्रिया शुरू की

सरकार ने लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए एएमसीए परियोजना में चयन प्रक्रिया शुरू की
Modified Date: May 27, 2026 / 07:38 pm IST
Published Date: May 27, 2026 7:38 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने के लिए निजी क्षेत्र के भागीदार के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अत्याधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एएमसीए) परियोजना को व्यापक रूप से देश का सबसे बड़ा स्वदेशी एयरोस्पेस कार्यक्रम माना जा रहा है।

सरकार ने चयन प्रक्रिया के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो और भारत फोर्ज को अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) या निविदा जारी की है।

लार्सन एंड टुब्रो ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, वहीं भारत फोर्ज ने बीईएमएल के साथ एक समझौता किया है।

सूत्रों ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

भारत अपनी वायुशक्ति क्षमता को मजबूत करने के लिए उन्नत स्टील्थ (रडार से बचने में सक्षम) विशेषताओं से लैस मध्यम-वजन वाले लड़ाकू विमानों को विकसित करने की महत्वाकांक्षी एएमसीए परियोजना पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

तेजस हल्के लड़ाकू विमान के साथ एएमसीए को भारतीय वायुसेना का मुख्य आधार बनाने की योजना है।

तीनों कंपनियों द्वारा अनुरोध प्रस्ताव के जवाब जमा करने के बाद, परियोजना के लिए चयन प्रक्रिया चार से पांच महीनों में पूरी होने की संभावना है।

चयनित निजी रक्षा कंपनी रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) के साथ मिलकर विमान के प्रोटोटाइप विकसित करेगी। इस परियोजना के तहत, सरकार एएमसीए के पांच प्रोटोटाइप बनाने की योजना बना रही है।

भारतीय वायुसेना अपनी दीर्घकालिक आवश्यकता को देखते हुए एएमसीए परियोजना के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

भारतीय वायुसेना 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) खरीदने की प्रक्रिया में भी है।

अप्रैल 2019 में, भारतीय वायुसेना ने लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से 114 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए प्रारंभिक निविदा जारी की थी।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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