सरकार को अलंद हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों को फिर से शुरू करने के लिए कहें राज्यपाल: भाजपा

सरकार को अलंद हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों को फिर से शुरू करने के लिए कहें राज्यपाल: भाजपा

सरकार को अलंद हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों को फिर से शुरू करने के लिए कहें राज्यपाल: भाजपा
Modified Date: June 2, 2026 / 06:28 pm IST
Published Date: June 2, 2026 6:28 pm IST

बेंगलुरु, दो जून (भाषा) कर्नाटक भाजपा ने मंगलवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से कलबुर्गी जिले के अलंद में 2022 की सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े सात आपराधिक मामलों को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले को पलटने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि आपराधिक मामलों को वापस लेने जैसा कदम कानून के शासन और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर करेगा।

राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालवाड़ी नारायणस्वामी ने कहा कि लाडले मशक दरगाह के अंदर राघव चैतन्य शिवलिंग स्थित है।

नारायणस्वामी ने कहा, “यह झगड़ा नया नहीं है, बल्कि पिछले 600 वर्ष से चल रहा है। दंगे बार-बार होते रहते हैं और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है।”

उन्होंने कहा कि शिवलिंग के अपमान का विरोध और उसका शुद्धिकरण करने वालों पर तलवारों, धारदार हथियारों और पत्थरों से लैस हजारों सशस्त्र लोगों ने हमला किया था। भाजपा नेता ने बताया कि भीड़ ने कलबुर्गी के उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों को भी नहीं बख्शा था।

नारायणस्वामी ने कहा, “इस तरह की हिंसा करने वालों के खिलाफ मामले वापस लेना बेहद निंदनीय है।”

राज्यपाल को दिए अपने ज्ञापन में भाजपा ने एक मार्च, 2022 को राघव चैतन्य शिवलिंग पूजा घटना से जुड़ी हिंसा के परिणामस्वरूप सात आपराधिक मामलों को वापस लेने को मंजूरी देने वाले मंत्रिमंडल के फैसले को वापस लेने की मांग की।

भाजपा ने ज्ञापन में कहा, “कर्नाटक सरकार द्वारा मनमाने ढंग से और लापरवाही से आरोपियों के खिलाफ लंबित गंभीर आपराधिक मामलों को वापस लेने के इस दुस्साहसी कृत्य का राज्य में आपराधिक कानून के प्रवर्तन और प्रशासन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”

पार्टी ने तर्क दिया कि सात मामले दर्ज किए गए थे जिनमें कथित तौर पर एक गैरकानूनी भीड़ ने धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और सांप्रदायिक दंगे में लिप्त होकर एक धार्मिक कार्यक्रम को बाधित किया, जिसे उच्च न्यायालय द्वारा अनुमति और संरक्षण दिया गया था।

भाजपा ने कहा, “यह निवेदन किया जाता है कि सांप्रदायिक दंगों के ऐसे कृत्य न केवल राज्य की कानून व्यवस्था को प्रभावित करते हैं बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था को भी गंभीर रूप से बाधित करते हैं।”

ज्ञापन में आगे आरोप लगाया गया कि सांप्रदायिक हिंसा के अलावा, आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और सरकारी संपत्ति और पुलिस मशीनरी को नुकसान पहुंचाया।

पार्टी ने तर्क दिया कि इन मामलों में “दंगा, गैरकानूनी सभा, लोक सेवकों पर क्रूर हमले, संपत्ति का विनाश और आधिकारिक कर्तव्यों में बाधा डालने के गंभीर आरोप” शामिल हैं और इसलिए व्यापक जनहित में निरंतर अभियोजन की आवश्यकता है।

राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग करते हुए, भाजपा ने अनुरोध किया कि सरकार को सात मामलों को वापस लेने से संबंधित मंत्रिमंडल के फैसले को वापस लेने का निर्देश दिया जाए, यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी वापसी प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले प्रभावित पीड़ितों के विचारों पर सोचा जाए, और उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार पुनर्विचार किए जाने तक इस निर्णय पर आगे की कार्रवाई रोक दी जाए।

भाषा प्रशांत माधव

माधव


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