राज्यपाल का विधानसभा में अभिभाषण, टीवीके सरकार ने प्रमुख मुद्दों पर द्रविड़ दलों की नीति बरकरार रखी

राज्यपाल का विधानसभा में अभिभाषण, टीवीके सरकार ने प्रमुख मुद्दों पर द्रविड़ दलों की नीति बरकरार रखी

राज्यपाल का विधानसभा में अभिभाषण, टीवीके सरकार ने प्रमुख मुद्दों पर द्रविड़ दलों की नीति बरकरार रखी
Modified Date: June 18, 2026 / 02:38 pm IST
Published Date: June 18, 2026 2:38 pm IST

(तस्वीरों सहित)

चेन्नई, 18 जून (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा में अपने पहले अभिभाषण में राज्यपाल आर. वी. आर्लेकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार केंद्र से कर राजस्व में राज्य के उचित वित्तीय अंतरण को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी और न्यायसंगत वित्तीय बंटवारे के मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ेगी।

राज्यपाल के अभिभाषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने दो-भाषा नीति और राज्यों के अधिकारों जैसे प्रमुख मुद्दों पर पूर्ववर्ती द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) सरकारों की नीतियों को जारी रखने का फैसला किया है।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार एक “सामाजिक न्याय सर्वेक्षण” कराएगी।

यह अभिभाषण 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के बाद टीवीके की पहली सरकार बनने के उपरांत परंपरागत रूप से दिया गया संबोधन था।

राज्यपाल आर्लेकर ने अपने अभिभाषण की शुरुआत सी. एन. अन्नादुरै और ‘पेरियार’ ई. वी. रामासामी सहित कई महान नेताओं की विरासत का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को पूरा पढ़ा, जिसमें केंद्र पर धन आवंटन में भेदभाव के आरोप जैसे तीखे संदर्भ भी शामिल थे।

सत्र की शुरुआत तमिल गीत और राष्ट्रगान के साथ हुई। दिन की कार्यवाही समाप्त होने पर भी राष्ट्रगान गाया गया। मुख्य विपक्षी दल द्रमुक के विधायक काली पट्टी पहनकर सदन में पहुंचे और मुख्यमंत्री से कथित अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर जवाब देने और कार्रवाई करने की मांग की।

द्रमुक कार्यकाल (2021-2026) के दौरान तत्कालीन राज्यपाल आर. एन. रवि और द्रविड़ दल के बीच कई मुद्दों पर टकराव हुआ था। इनमें विधानसभा सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान नहीं गाए जाने का मुद्दा भी शामिल था।

रवि एक अवसर पर सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़े बिना ही सदन से बाहर चले गए थे। उन्होंने अपने अभिभाषण में द्रविड़ नेताओं के संदर्भ जैसे कुछ हिस्सों को हटा दिया था और कुछ नए बिंदु जोड़ दिए थे, जिससे तत्कालीन एम. के. स्टालिन सरकार खफा हो गई थी।

हालांकि, बृहस्पतिवार को विधानसभा का माहौल पूरी तरह अलग दिखाई दिया।

सरकार द्वारा तैयार पाठ पर कायम रहते हुए आर्लेकर ने सत्तारूढ़ व्यवस्था के वैचारिक मार्गदर्शकों पेरियार, पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रानी वेलु नाच्चियार और अंजलाई अम्मल का उल्लेख किया।

राज्यपाल ने कहा कि तमिलनाडु ने ऐसा राजनीतिक परिवर्तन देखा है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।

उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को “हमारे समय का ऐतिहासिक नेता” बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी टीवीके की स्थापना के महज दो वर्षों के भीतर सरकार बना ली। विजय ने धनबल जैसी अनेक बाधाओं को पार करते हुए लोकतंत्र की जीत सुनिश्चित की।

उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार होने के बावजूद टीवीके शासन ने “सत्ता में साझेदारी और शासन में साझेदारी” का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जो तमिलनाडु के 74 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिला।

आर्लेकर ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ हुई पहली बैठक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई लंबित मांगों से संबंधित एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा था।

इन मांगों में होसुर के निकट सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) की स्थापना और कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध निर्माण के प्रयास को रोकना शामिल था। इसके अलावा श्रीलंका द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी रोकने तथा गिरफ्तार मछुआरों की तत्काल रिहाई व उनकी नौकाएं छोड़ने की मांग भी की गई थी।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राजमार्ग परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने और होसुर, कोयंबटूर तथा मदुरै में मेट्रो रेल परियोजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी देने का भी अनुरोध किया था।

नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में भी विजय ने इन मांगों को दोहराया था।

राज्यपाल ने कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी और तमिलनाडु को आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को दिए गए करों में तमिलनाडु के हिस्से की मांग को लेकर विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

आर्लेकर ने कहा, “प्रस्ताव पारित करने के साथ-साथ इस मुद्दे को उच्चतम न्यायालय तक ले जाने के लिए एक विशेष कानूनी समिति गठित की जाएगी ताकि राज्य को वित्तीय बंटवारे में उसका न्यायसंगत हिस्सा मिल सके।”

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को मिलने वाले प्रत्येक रुपये का पूरा लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा और राज्य के प्रति केंद्र सरकार के कथित “भेदभावपूर्ण रवैये” पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तमिलनाडु को केंद्र सरकार से वित्तीय बंटवारे में उसका वैध हिस्सा मिले।

राज्यपाल ने कहा, “यह सरकार तमिलनाडु के हितों की रक्षा, राज्यों के अधिकारों के लिए संघर्ष, आवश्यक परियोजनाओं के क्रियान्वयन और नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखेगी।”

आर्लेकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की वित्तीय स्थिति में गंभीर गिरावट आई है।

उन्होंने कहा, “पिछले पांच वर्षों में राज्य का कर्ज लगभग दोगुना होकर 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 28.3 प्रतिशत है। परिणामस्वरूप तमिलनाडु में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर एक लाख रुपये से अधिक का कर्ज बोझ बन चुका है।”

राज्यपाल ने कहा कि राजस्व और कर संग्रह विभागों में राजस्व चूक तथा व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण कर राजस्व में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में जहां कर राजस्व जीएसडीपी का 5.93 प्रतिशत था, वहीं 2025-26 में यह घटकर 5.45 प्रतिशत रह गया।

भाषा खारी मनीषा नरेश

नरेश


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