सरकार अमेरिका के आगे झुक गयी, किसान प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेंगे : कांग्रेस सांसद गोहिल
सरकार अमेरिका के आगे झुक गयी, किसान प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकेंगे : कांग्रेस सांसद गोहिल
नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) राज्यसभा में शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने सरकार पर अमेरिका के सामने झुकने और व्यापार समझौता करने का आरोप लगाया तथा प्रश्न किया कि भारत का किसान प्रतिस्पर्धा में कैसे टिक पाएगा?
उच्च सदन में वित्त विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि वित्त विधेयक में कोई नयी बात नहीं है बस आंकड़ों के साथ मामूली छेड़छाड़ की गयी है।
उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि जहां वर्ष दर वर्ष आयकर की दर बढ़ी वहीं निगमित कर में कमी हुई है यानी अमीर को कम कर देना पड़ रहा है और आम आदमी पर ज्यादा कर लगाया जा रहा है।
गोहिल ने कहा कि सरकार को कहीं भी किसान या गरीब नहीं दिखाई देता है तथा वित्त विधेयक में महिलाओं के लिए कुछ नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि गुजरात महात्मा गांधी की भूमि है किंतु उन्हीं के राज्य में स्थित गांधी नगर की ‘गिफ्ट सिटी’ को शराब पाबंदी से छूट दी गयी है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में उस व्यक्ति को शक्तिशाली माना जाता है जिसके पास डाटा है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक उपभोक्ता भारत में हैं और उनका डाटा दुनिया में सभी को लेना चाहता है।
कांग्रेस सदस्य ने दावा किया कि देश में 67 प्रतिशत स्नातक युवा बेरोजगार हैं।
उन्होंने कहा कि आज सोयाबीन आयात पर शून्य शुल्क लग रहा है, ऐसे में आप अपने देश के किसानों से यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि वह विदेशी उत्पादों के साथ कैसे प्रतिस्पर्धा करेंगे।
गोहिल ने कहा कि यदि आप ऐसे ही अमेरिका के सामने झुकेंगे, उसके साथ व्यापार समझौता करेंगे तो देश के किसान कैसे टिक पाएंगे? उन्होंने कहा कि आज किसान को आत्महत्या के लिए विवश होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उपकर और अधिभार लेकर कर वसूलती है किंतु इस कर वसूली में से राज्यों को कोई भी हिस्सा नहीं मिलता है।
कांग्रेस सदस्य ने महत्वपूर्ण खनिजों पर शून्य कर लगाने के सरकार के कदम का विरोध करते हुए कहा कि इससे महत्वपूर्ण खनिज बाहर से आयेंगे और देश में इन खनिजों को ढूंढने एवं खनन के लिए कोई आगे नहीं आएगा।
उन्होंने कहा कि गुजरात के करोड़ों रूपये कृष्णा गोदावरी बेसिन परियोजना में डाल दिये गए किंतु कुछ भी उत्पादन नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार की कर प्रणाली ‘ट्रस्ट बेस्ड (विश्वास आधारित’ नहीं है ‘‘त्रासदी आधारित’’ है। उन्होंने कहा कि आज जीएसटी सहित तमाम करों के लिए लोगों को परेशान किया जा रहा है।
भाषा
माधव मनीषा
मनीषा

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