नए परिसीमन आयोग के गठन के लिए विधेयक पेश करेगी सरकार

नए परिसीमन आयोग के गठन के लिए विधेयक पेश करेगी सरकार

नए परिसीमन आयोग के गठन के लिए विधेयक पेश करेगी सरकार
Modified Date: April 14, 2026 / 08:17 pm IST
Published Date: April 14, 2026 8:17 pm IST

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) सरकार संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत इस सप्ताह होने वाली विशेष बैठक के दौरान परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेगी। इसके तहत केंद्र सरकार ‘‘नवीनतम जनगणना आंकड़ों’’ के आधार पर और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा तथा विधानसभाओं में सीटों के निर्धारण के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन कर सकेगी।

महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से इस विधेयक की प्रति को संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 के साथ संसद सदस्यों के बीच वितरित किया गया है।

नए विधेयक के कई प्रावधान 2002 के कानून के समान हैं। इस विधेयक के माध्यम से 2002 के परिसीमन कानून को निरस्त कर दिया जाएगा।

परिसीमन विधेयक, 2026 के मसौदे के अनुसार, ‘‘केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक आयोग का गठन कर सकती है, जिसे परिसीमन आयोग कहा जाएगा। आयोग में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे, ‘एक सदस्य वे होंगे, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हैं या रहे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (खुद) या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा नामित एक निर्वाचन आयुक्त, पदेन सदस्य होंगे और राज्य चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य होंगे।’’

विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा आयोग का कार्यकाल निर्दिष्ट कर सकती है।

इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार, आयोग के अनुरोध पर आयोग का कार्यकाल उस अवधि के लिए बढ़ा सकती है, जिसे वह आवश्यक समझे।

विधेयक में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उस क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के लिए परिसीमन आयोग के रूप में काम करेगा, जो पाकिस्तान के कब्जे में है।’’

इस विधेयक के मुताबिक, ‘‘यह परिसीमन आयोग का कर्तव्य होगा कि वह नवीनतम जनगणना के आंकड़े के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लोकसभा में सीटों का आवंटन, प्रत्येक राज्य की विधानसभा में सीटों की कुल संख्या और लोकसभा और विधानसभा चुनाव के उद्देश्य से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करने का पुन: समायोजन करे।’’

विधेयक में यह भी कहा गया है कि आयोग प्रत्येक राज्य के संबंध में अपने काम में सहायता करने के उद्देश्य से 10 व्यक्तियों को अपने साथ जोड़ेगा, जिनमें से पांच उस राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सदस्य होंगे और पांच उस राज्य की विधानसभा के सदस्य होंगे।

इसमें कहा गया है कि यदि लोकसभा में किसी राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच या उससे कम सदस्य हैं, तो ऐसे में उस प्रदेश से जुड़े सभी लोकसभा सदस्य आयोग के सहयोगी सदस्य होंगे।

विधेयक आयोग को भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त या उनके नामित व्यक्ति, भारत के महासर्वेक्षक या उनके नामित व्यक्ति या केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी अन्य अधिकारी या भौगोलिक सूचना प्रणाली के किसी विशेषज्ञ या किसी अन्य व्यक्ति को बुलाने की शक्ति देता है।

इसमें कहा गया है, ‘‘आयोग प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को आवंटित लोकसभा सीटों और प्रत्येक राज्य की विधानसभा को सौंपी गई सीटों को एकल सदस्यीय क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में वितरित करेगा और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर उनका परिसीमन करेगा।’’

मसौदा कानून में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र को इस तरह से परिसीमित किया जाएगा कि वह पूरी तरह से किसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आ जाए।

भाषा हक हक अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में