गुजरात दलित पिटाई मामला : अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराया, 35 लोग बरी
गुजरात दलित पिटाई मामला : अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराया, 35 लोग बरी
गिर सोमनाथ, 16 मार्च (भाषा) गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल स्थित एक विशेष अदालत ने सोमवार को 2016 के ऊना दलित पिटाई मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया और 35 अन्य को बरी कर दिया। अदालत मंगलवार को सजा सुनाएगी।
इस मामले में चार दलित पुरुषों को उस समय पीटा गया था जब वे एक मृत गाय की खाल उतार रहे थे। इस मामले को लेकर तब देशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
सरकारी वकील केतनसिंह वाला ने बताया कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश जे.जे. पंड्या ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराया और 35 अन्य को बरी कर दिया, जबकि सुनवाई के दौरान एक पुलिसकर्मी की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि पांचों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (चोट पहुंचाना), धारा 324 (खतरनाक हथियारों से जानबूझकर चोट पहुंचाना), धारा 342 (बंधक बनाना) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है।
सरकारी वकील ने बताया कि अदालत ने आरोपियों को आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), धारा 397 (डकैती), धारा 365 (अपहरण), धारा 147 (दंगा), धारा 355 (किसी व्यक्ति को अपमानित करने के इरादे से हमला) और धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी नहीं ठहराया।
उन्होंने बताया कि इस मामले में रमेश जाधव, राकेश जोशी, नगजी वानिया, प्रमोदगिरि गोस्वामी और बलवतगिरि गोस्वामी को दोषी ठहराया गया है, जबकि एक नाबालिग के खिलाफ फैसला अभी लंबित है।
उन्होंने कहा कि अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान लगभग 260 गवाहों से पूछताछ की।
यह घटना 11 जुलाई, 2016 को गिर सोमनाथ जिले के ऊना कस्बे के पास मोटा समाधियाला गांव में घटी, जब चार दलित युवक अपने पारंपरिक पेशे के तहत मृत गाय की खाल उतार रहे थे।
मामले के मुताबिक, स्वयं को गौरक्षक बताने वाले आरोपियों ने युवकों को बुरी तरह पीटा, जिन्हें बाद में अवैध रूप से हवालात में डाल दिया गया और पुलिसकर्मियों ने भी उनकी पिटाई की। आरोप है कि चारों दलितों को लगभग 4-5 घंटे तक पीटा गया। पुलिस पर आरोप है कि उसने अपराधियों के साथ मिलीभगत की और उनकी मदद के लिए प्राथमिकी से संबंधित कुछ दस्तावेजों में हेराफेरी की।
आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने दलित युवकों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों ने उन्हें धमकाया। इसके बाद ग्रामीणों ने गांधीनगर और अहमदाबाद स्थित पुलिस नियंत्रण कक्षों को फोन किया।
आरोपियों पर घटना के वीडियो क्लिप बनाने और प्रसारित करने के आरोप में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए और 66बी के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
भाषा शफीक सुरेश
सुरेश

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