गुजरात सरकार ने पारेषण लाइन और टावरों के लिए किसानों को मिलने वाले मुआवजे में बढ़ोतरी की
गुजरात सरकार ने पारेषण लाइन और टावरों के लिए किसानों को मिलने वाले मुआवजे में बढ़ोतरी की
अहमदाबाद, चार जुलाई (भाषा) गुजरात सरकार ने किसानों की जमीन पर पारेषण लाइन और टावर लगाने के बदले दिए जाने वाले मुआवजे में बढ़ोतरी की है और अब मुआवजे की गणना जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य के दोगुने के आधार पर की जाएगी जिससे किसानों को अधिक न्यायसंगत और बाजार आधारित भुगतान सुनिश्चित होगा।
राज्य के कई हिस्सों में किसान कृषि भूमि पर पारेषण लाइन और खंभे लगाने की पुरानी नीति का विरोध कर रहे थे।
शुक्रवार को जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘ अब तक कृषि भूमि पर बिजली के खंभों और पारेषण लाइनों के लिए मुआवजा जंत्री दर के 200 प्रतिशत के आधार पर दिया जाता था। किसान संगठनों की पुरानी मांगों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब मुआवजे की गणना जंत्री दर के बजाय जमीन के प्रचलित बाजार मूल्य के दोगुने के आधार पर की जाएगी।’’
जंत्री दर गुजरात सरकार द्वारा निर्धारित भूमि और संपत्ति की सरकारी मूल्य सूची होती है।
बयान के अनुसार सरकार ने पारेषण टावरों के लिए ली गई जमीन के लिए मिलने वाले मुआवजे में भी वृद्धि की है।
विज्ञप्ति में बताया गया कि पहले मुआवजा केवल टावर के वास्तविक आधार क्षेत्र (बेस एरिया) के अनुसार दिया जाता था पर अब नयी नीति के तहत टावर के आधार क्षेत्र में चारों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र भी जोड़ा जाएगा, जिससे मुआवजे योग्य क्षेत्र बढ़ेगा और भूमि मालिकों को अधिक भुगतान मिलेगा।
किसानों को एक और बड़ी राहत देते हुए सरकार ने मुआवजे की किस्तों में भुगतान की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी है। पहले मुआवजा तीन चरणों में दिया जाता था- 40 प्रतिशत नींव का काम शुरू होने पर, 40 प्रतिशत टावर स्थापित होने पर और शेष 20 प्रतिशत पारेषण लाइन लगने के बाद।
नयी नीति के तहत अब काम शुरू होने से पहले ही 100 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा।
बयान में कहा गया, ‘‘राज्य सरकार भूमि के बाजार मूल्य का पारदर्शी और निष्पक्ष निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए बाजार दर समिति का गठन करेगी। इस समिति में संबंधित जिलाधिकारी, प्रभावित भूमि मालिकों के प्रतिनिधि, किसानों द्वारा नामित अधिकृत बाजार मूल्यांकनकर्ता तथा पारेषण सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे।’’
भाषा शोभना सिम्मी
सिम्मी

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